Rupee vs Dollar: पिछले कुछ दिनों की भारी गिरावट के बाद रुपया के लिए थोड़ी राहत भरी खबर आई है. शुक्रवार, 22 मई को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकवर होकर 95.86 के स्तर पर पहुंच गया. वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी और डॉलर की मांग घटने से रुपये को यह मजबूती मिली है.
रुपया क्यों अचानक मजबूत हुआ?
रुपये में सुधार की दो मुख्य वजह हैं. पहली, इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) की कीमतें गिरकर 104 डॉलर से 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई हैं. दूसरी, अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते (Peace Deal) की उम्मीदें जगी हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सकारात्मक बयानों से बाजार का सेंटिमेंट सुधरा है, जिससे इन्वेस्टर्स का भरोसा बढ़ा है.
आरबीआई (RBI) ने कैसे बचाई लाज?
लगातार गिरावट के कारण रुपया एक समय 97 के साइकोलॉजिकल लेवल को पार करने वाला था. ऐसे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बाजार में दखल दिया और डॉलर बेचे. आरबीआई के इस कदम की वजह से रुपया 96.50 के पार जाने से बच गया. इसके अलावा, 26 मई को होने वाली आरबीआई की 5 अरब डॉलर की स्वैप नीलामी (Swap Auction) से भी इन्वेस्टर्स का उत्साह बढ़ा है.
एक महीने में कितना नुकसान हुआ?
भले ही रुपये में सुधार दिख रहा हो, लेकिन पिछले एक महीने में यह अपनी वैल्यू का 2.2% और पिछले तीन महीनों में करीब 6% हिस्सा गंवा चुका है. पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और युद्ध के खतरे के कारण ग्लोबल इन्वेस्टर्स उभरते बाजारों (जैसे भारत) से पैसा निकालकर सोना और अमेरिकी डॉलर जैसी सुरक्षित जगहों पर लगा रहे हैं. इसी वजह से डॉलर इंडेक्स (DYX) अभी भी 99.227 के मजबूत स्तर पर बना हुआ है.
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