Repo Rate Cut: भारतीय रिजर्व बैंक ने कल अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिए 25 बेसिस प्वाइंट की रेट कट कर दी है. मतलब बैंकों के लिए सस्ती दर पर पैसा लेना आसान हो गया है और आगे चलकर आम लोगों के लिए भी लोन लेना थोड़ा हल्का हो सकता हैं. इसके साथ RBI ने 1 लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड खरीदने और तीन साल के डॉलर–रुपया स्वैप की भी घोषणा की है. यह दोनों कदम बाजार में ज्यादा पैसा डालने का इशारा कर रहे हैं, जिससे अर्थव्यवस्था को सीधे ताकत मिल सकती है.
सबसे ज्यादा फायदा आखिर किसे होगा?
सबसे पहले तो वो लोग खुश हो सकते हैं जिनकी EMI चल रही है, जैसे होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन आदि. ब्याज दरें धीरे-धीरे कम होती हैं तो EMI भी कम होती है, और हर महीने का बोझ भी थोड़ा हल्का लगता है. दूसरा बड़ा फायदा उन युवाओं को है जो पहला घर, बाइक, कार या किसी बड़े खर्च के लिए लोन लेने का प्लान कर रहे हैं. कम रेट पर लोन मिलना हमेशा बेहतर डील होता है.
निवेश करने वालों को इसमें क्या मौका दिख रहा है?
मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि रेट कट और लिक्विडिटी बढ़ने से शेयर बाजार में पॉजिटिव सेंटिमेंट दिखने वाला है. यही वजह है कि वित्तीय सेक्टर, ऑटो, रियल्टी जैसे सेक्टरों में तेजी देखी गई है. जिन्हें सुरक्षित निवेश पसंद है, उनके लिए सरकारी बॉन्ड और गिल्ट फंड इस समय अच्छे माने जा रहे हैं. दरें गिरने पर लंबे समय वाले सरकारी बॉन्ड बेहतर रिटर्न देते हैं, इसलिए कई सलाहकार 5–7 साल के G-Sec और गिल्ट फंड्स को अच्छा विकल्प मान रहे हैं.
गिल्ट फंड आखिर होते क्या हैं?
गिल्ट फंड ऐसे म्यूचुअल फंड होते हैं जो सिर्फ सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं. ये सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि निवेश का पैसा सीधे सरकार से जुड़ा होता है. इनका समय तीन साल से बीस साल तक का होता है और कुछ फंड्स में 10 साल का लॉक-इन भी होता है. पिछले कुछ सालों में UTI, Axis, ICICI जैसे कई गिल्ट फंड्स ने स्थिर और ठीक-ठाक रिटर्न दिए हैं.
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