RBI MPC Meeting: अगले हफ्ते रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की एक अहम बैठक होने वाली है, जिस पर सबकी नजरें टिकी हैं. आर्थिक जानकारों का मानना है कि इस बार आपकी लोन की ईएमआई (EMI) में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन भविष्य को लेकर बैंक थोड़ा सावधान रह सकता है.
4 पॉइंट में समझें
- क्या ब्याज दरें बढ़ेंगी?: बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस और अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि RBI इस बार रेपो रेट (वह दर जिस पर बैंक RBI से कर्ज लेते हैं) को वैसा ही रखेगा जैसा वह अभी है. यानी आपकी होम लोन या कार लोन की किस्तों में फिलहाल बढ़ोत्तरी की आशंका कम है.
- महंगाई और युद्ध का डर: दुनिया भर में चल रहे युद्ध और तनाव की वजह से कच्चे तेल (Brent Crude) के दाम बढ़कर $100 प्रति बैरल के करीब पहुंच गए हैं. इसका सीधा असर भारत में महंगाई पर पड़ता है. RBI इस बैठक में बताएगा कि आने वाले समय में वह महंगाई और देश की तरक्की (GDP) को किस नजर से देख रहा है.
- क्या आगे बढ़ सकते हैं रेट?: अभी भले ही बदलाव न हो, लेकिन RBI ने एक चेतावनी दी है. अगर महंगाई दर 6 प्रतिशत की लक्ष्मण रेखा को पार कर जाती है, तो साल के अंत तक बैंक ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी कर सकता है.
- कैश और रुपये की स्थिति: बाजार में पैसों की कमी (Liquidity) या रुपये की कीमत को संभालने के लिए अभी किसी नए बड़े कदम की उम्मीद नहीं है. जानकारों का कहना है कि RBI जरूरत पड़ने पर समय-समय पर इसके लिए कदम उठाता रहेगा.
कुछ जरूरी शब्द और उनके मतलब
रेपो रेट (Repo Rate): वह रेट जिस पर रिजर्व बैंक दूसरे बैंकों को लोन देता है. अगर यह बढ़ता है, तो आपका लोन महंगा हो जाता है.
MPC (Monetary Policy Committee): यह 6 लोगों की एक टीम होती है जो तय करती है कि देश में ब्याज दरें क्या होंगी.
महंगाई बैंड (Tolerance Band): सरकार ने RBI को महंगाई 2% से 6% के बीच रखने का जिम्मा दिया है. इससे ऊपर जाना खतरे की घंटी है.
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