आरबीआई गवर्नर ने ये क्यों कहा, ”मैं संजय हूं, लेकिन महाभारत का नहीं?”

RBI Governor: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट पर पूछे सवाल के जवाब में कहा, “मैं संजय हूं, लेकिन महाभारत का नहीं.” उन्होंने ब्याज दरों में भविष्य की कटौती को लेकर दिव्य दृष्टि न होने की बात कही. यह बयान मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद आया, जहां लगातार दूसरी बार रेपो रेट में कटौती की गई.

RBI Governor: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा के बाद ब्याज दरों का ऐलान के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेपो रेट में भविष्य में कटौती को लेकर पूछे गए सवाल का बेहद रोचक अंदाज में जवाब दिया. उन्होंने कहा, “मैं संजय हूं, लेकिन महाभारत का संजय नहीं, जो भविष्य की भविष्यवाणी कर सके.”

उनसे यह सवाल पूछा गया था कि क्या भविष्य में ब्याज दरों (Interest Rates) में और कटौती की जा सकती है? इस पर मल्होत्रा ने साफ कहा कि वे भविष्यवाणी नहीं कर सकते, क्योंकि उनके पास महाभारत वाले संजय जैसी दिव्य दृष्टि नहीं है.

RBI ने लगातार दूसरी बार घटाई Repo Rate

संजय मल्होत्रा के गवर्नर बनने के बाद यह लगातार दूसरी बार रेपो रेट में कटौती (Repo Rate Cut) हुई है. यह कदम भारत की आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के प्रयासों का हिस्सा है. उन्होंने बताया कि मौद्रिक नीति (Monetary Policy) और राजकोषीय नीति (Fiscal Policy) मिलकर काम कर रही हैं, ताकि देश में आर्थिक स्थिरता बनी रहे.

सरकार और RBI का संयुक्त प्रयास

गवर्नर संजय महल्होत्रा ने कहा कि सरकार ने बजट के जरिए पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) को बढ़ाया है और कर छूट के उपाय किए हैं. इसके साथ ही, RBI ने भी रेपो रेट में कटौती कर बाजार को राहत दी है. उन्होंने कहा, “यह एक संयुक्त प्रयास है, जिसमें हम वृद्धि और मुद्रास्फीति की गतिशीलता को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं.”

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महाभारत के संजय की तुलना क्यों?

महाभारत के संजय को दिव्य दृष्टि प्राप्त थी, जिससे वे कुरुक्षेत्र के युद्ध की घटनाएं नेत्रहीन राजा धृतराष्ट्र को बताते थे. इस संदर्भ में, गवर्नर मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि वे दूरदृष्टा नहीं हैं, जो बता सकें कि ब्याज दरें भविष्य में कहां जाएंगी.

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By Kumarvishwat sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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