Money Laundering : रैपिडो ड्राइवर… महीने की कमाई 10 हजार, पर खाते में मिले 300 करोड़ ! खुल गया ₹550 करोड़ का बड़ा राज

Money Laundering: यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब जांच एजेंसियों की नजर प्रदीप ओडे नाम के एक ड्राइवर के बैंक खाते पर पड़ी. प्रदीप की माली हालत साधारण थी, लेकिन उसके खाते में ₹300 करोड़ से ज्यादा के ट्रांजेक्शन हुए थे.

Money Laundering : अहमदाबाद में जांच एजेंसियों ने एक ऐसे रैपिडो ड्राइवर को पकड़ा है, जिसकी कमाई तो महीने की मुश्किल से 10-12 हजार रुपये थी, लेकिन उसके बैंक अकाउंट से करोड़ों का खेल हो रहा था. जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गहराई से जांच की, तो ₹550 करोड़ के एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ, जिसमें सट्टेबाजी, स्टॉक मार्केट में हेराफेरी और हवाला के जरिए पैसों का लेन-देन किया जा रहा था.

कैसे पकड़ में आया ये खेल ?

इंडिया टूडे एक अनुसार यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब जांच एजेंसियों की नजर प्रदीप ओडे नाम के एक ड्राइवर के बैंक खाते पर पड़ी. प्रदीप की माली हालत साधारण थी, लेकिन उसके खाते में ₹300 करोड़ से ज्यादा के ट्रांजेक्शन हुए थे. इतनी बड़ी रकम देखकर ED के अधिकारियों के कान खड़े हो गए और उन्होंने तुरंत अहमदाबाद क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई.

महज ₹25,000 के लिए किराए पर दिया अकाउंट

जब प्रदीप से पूछताछ की गई, तो उसने चौंकाने वाला खुलासा किया. उसने बताया कि उसने अपना बैंक अकाउंट किरण परमार नाम के शख्स को ₹25,000 के लालच में किराए पर दे दिया था. इसके अलावा, वह हर चेक साइन करने के बदले ₹400 अलग से लेता था. जालसाजों ने प्रदीप के आईडी प्रूफ का इस्तेमाल करके ‘प्रदीप एंटरप्राइज’ नाम की एक फर्जी कंपनी भी बना डाली थी.

फर्जी कंपनियों का जाल और सट्टेबाजी का पैसा

जांच में सामने आया कि सिर्फ प्रदीप ही नहीं, बल्कि ‘कमलेश ट्रेडिंग’ और ‘रौनक ट्रेडर्स’ नाम की दो और फर्जी कंपनियां कागजों पर बनाई गई थीं. ये कंपनियां 2024 में रजिस्टर्ड हुईं और इनका कोई असली बिजनेस नहीं था. इनके खातों में कुल मिलाकर ₹550 करोड़ जमा किए गए थे. अधिकारियों के मुताबिक, यह पैसा ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाजी (Online Betting) से कमाया गया था, जिसे ठिकाने लगाने के लिए इन खातों का इस्तेमाल हुआ.

स्टॉक मार्केट में हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग

इस गिरोह ने सिर्फ सट्टेबाजी ही नहीं की, बल्कि शेयर बाजार में भी ‘गंदा खेल’ खेला.

  • सर्कुलर ट्रेडिंग: इन्होंने शेयरों की फर्जी खरीद-फरोख्त दिखाकर उनकी कीमतों और ट्रेडिंग वॉल्यूम को जानबूझकर बढ़ाया.
  • पेनी स्टॉक्स का खेल: छोटे और सस्ते शेयरों के जरिए ब्लैक मनी को व्हाइट करने की कोशिश की गई.
  • इम्पैक्ट गुरु (Impact Guru) का इस्तेमाल: जांच में यह भी पता चला कि इन्होंने ‘इम्पैक्ट गुरु’ जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए संदिग्ध डोनेशन देकर पैसा घुमाने की कोशिश की.

बड़े कारोबारियों तक पहुंचे तार

जांच में यह भी पता चला कि इन्होंने ‘इम्पैक्ट गुरु’ जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए संदिग्ध डोनेशन देकर पैसा घुमाने की कोशिश की. जांच की आंच गांधीधाम के एक बिजनेसमैन तक भी पहुंची है. उसके निजी खर्चों और शादी के बड़े खर्चों की जांच की जा रही है. साथ ही, शेख मोइन मोहम्मद शफी नाम के शख्स की भूमिका की भी जांच हो रही है, जिसने फर्जी पहचानों का इस्तेमाल कर इस पूरे नेटवर्क को चलाने में मदद की.

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Published by: Abhishek pandey

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अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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