Popcorn GST: थिएटर में पॉपकॉर्न का शौक अब पड़ेगा महंगा, जीएसटी काउंसिल ने तय की नई दरें

Popcorn GST: थिएटर में मूवी का आनंद पॉपकॉर्न के साथ लेने का शौक अब आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है,क्योंकि पॉपकॉर्न की कीमतें अब इसके फ्लेवर और पैकेजिंग के आधार पर निर्धारित होंगी.

Popcorn GST: थिएटर में मूवी का आनंद पॉपकॉर्न के साथ लेने का शौक अब आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है,क्योंकि पॉपकॉर्न की कीमतें अब इसके फ्लेवर और पैकेजिंग के आधार पर निर्धारित होंगी. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में राजस्थान के जैसलमेर में हुई जीएसटी काउंसिल की 55वीं बैठक में पॉपकॉर्न पर नई जीएसटी दरों को मंजूरी दी गई. वित्त मंत्री ने इस बात की पुष्टि की कि पहले से पैक और लेबल किए गए रेडी-टू-ईट पॉपकॉर्न पर 12% जीएसटी लगेगा वहीं चीनी के साथ मिश्रित कारमेल पॉपकॉर्न पर 18% जीएसटी लागू होगी.

मौजूदा कर दरों में कोई बदलाव नहीं

महत्वपूर्ण यह है कि मौजूदा कर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. परिषद ने यह तय किया है कि केंद्रीय Indirect Tax और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) पॉपकॉर्न के लिए मौजूदा कराधान नियमों पर और स्पष्टता देने के लिए एक परिपत्र जारी करेगा. वर्तमान में रेडी-टू-ईट पॉपकॉर्न, जो आमतौर पर नमक और मसालों के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है और इसमें नमकीन की विशेषताएं होती हैं. यदि यह पहले से पैक और लेबल नहीं है तो इस पर 5% जीएसटी लगेगा. यदि यह पहले से पैक और लेबल है तो जीएसटी दर 12% होगी.

Caramelized Popcorn पर अधिक जीएसटी

जब पॉपकॉर्न (चीनी के साथ मिश्रित) के साथ करके कारमेल पॉपकॉर्न बनाया जाता है तो यह चीनी कन्फेक्शनरी की विशेषताओं को अपना लेता है और इसे HS कोड 1704 90 90 के तहत वर्गीकृत किया जाता है जिस पर 18% जीएसटी लागू होती है.

कारमेल पॉपकॉर्न पर अधिक कर के कारण की व्याख्या करते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया कि इसमें मिलाई गई चीनी इसे कार्बोनेटेड पेय पदार्थों के समान एक अलग श्रेणी में रखती है. जिस पर संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के कारण उच्च दरों पर कर लगाया जाता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नमकीन और सादे पॉपकॉर्न पर जीएसटी की दर अपरिवर्तित बनी हुई है.

कृषि उत्पादों पर GST उपचार

वित्त मंत्री ने कुछ कृषि उत्पादों पर जीएसटी उपचार को भी संबोधित किया. उन्होंने कहा कि काली मिर्च (चाहे ताजा, सूखी या हरी हो) और किशमिश जब एक किसान द्वारा सीधे सप्लाइ की जाती है, तो उन पर जीएसटी नहीं लगेगा. हालांकि अगर ये उत्पाद व्यापारियों द्वारा बेचे जाते हैं तो उन पर जीएसटी लागू होगा.

जीएसटी परिषद के अन्य महत्वपूर्ण निर्णय

वित्त मंत्री ने जीएसटी परिषद के अन्य महत्वपूर्ण निर्णयों की भी घोषणा की:

  • फोर्टिफाइड चावल कर्नेल पर जीएसटी दर को घटाकर 5% कर दिया गया है.
  • जीन थेरेपी अब जीएसटी से मुक्त है.
  • पूर्व-पैक और लेबल वाली वस्तुओं की परिभाषा में संशोधन की सिफारिश की गई.
  • बैंकों या वित्तीय संस्थानों द्वारा उधारकर्ताओं पर लगाए गए दंडात्मक शुल्क पर कोई जीएसटी देय नहीं होगा.
  • बीमा प्रीमियम पर जीएसटी में कटौती का निर्णय टाल दिया गया है क्योंकि आईआरडीएआई की टिप्पणियों सहित कई इनपुट का इंतजार है.
  • 50% से अधिक फ्लाई ऐश वाले एसीसी ब्लॉक पर 12% जीएसटी लगेगा.
  • काली मिर्च (ताजा, हरी या सूखी) और किशमिश पर जब किसान द्वारा सप्लाइ की जाती है, तो उन पर जीएसटी नहीं लगेगा.
  • लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एलआर-एसएएम) प्रणाली के लिए जीएसटी में छूट दी गई.
  • व्यापारियों को निर्यात सप्लाइ पर 0.1% की कमी की गई है.

इन निर्णयों के जरिए जीएसटी परिषद ने विभिन्न उद्योगों से जुड़े मुद्दों पर और कर नियमों की स्पष्टता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए हैं.

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By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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