PM Ujjwala Yojana : प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों के लिए केंद्र सरकार की तरफ से एक बहुत ही महत्वपूर्ण खबर आ रही है. सरकार ने इस योजना के तहत मिलने वाली ₹300 की अतिरिक्त सब्सिडी के नियमों को कड़ा कर दिया है. अब लाभार्थियों को साल भर में सिर्फ पहले 4 गैस सिलेंडरों पर ही ₹300 की अतिरिक्त छूट मिलेगी.
इससे पहले यह लाभ साल के 9 सिलेंडरों पर मिलता था. यह सब्सिडी राशि हमेशा की तरह सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में (DBT के जरिए) भेजी जाएगी. सोमवार को पेट्रोलियम मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी प्रवीण खनूजा ने एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध व पश्चिम एशिया के तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी (LPG) की कीमतें 46% तक बढ़ गई हैं, जिसके चलते सरकार को यह कड़ा फैसला लेना पड़ा है.
दिल्ली में अब क्या है सिलेंडर का भाव ?
रविवार (7 जून 2026) को घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में ₹29 की बढ़ोतरी की गई है. इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत ₹942 हो गई है. ऐसे में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को ₹300 की एक्स्ट्रा छूट मिलने के बाद यह सिलेंडर ₹642 में मिल रहा है (लेकिन याद रहे, यह छूट अब साल में सिर्फ 4 बार ही मिलेगी).
मंत्रालय के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस के दाम भड़कने से घरेलू एलपीजी सिलेंडर की वास्तविक लागत बढ़कर ₹1600 से ज्यादा हो गई है. सरकार और तेल कंपनियां इसका पूरा बोझ आम जनता पर नहीं डाल रही हैं.
- इनडायरेक्ट सब्सिडी: सरकार हर सिलेंडर पर ₹700 का नुकसान (अंडर रिकवरी) खुद झेल रही है, जो उज्ज्वला और नॉन-उज्ज्वला दोनों तरह के ग्राहकों के लिए समान है.
- घाटे का रिकॉर्ड: पिछले वित्त वर्ष के अंत तक घरेलू एलपीजी पर कुल अंडर-रिकवरी (नुकसान) बढ़कर 60,000 करोड़ रुपये पहुंच गई है, जो इससे पिछले साल 41,338 करोड़ रुपये थी. इस घाटे की भरपाई के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने तेल कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी है.
क्यों महंगी हुई गैस ?
भारत अपनी जरूरत का 60% एलपीजी विदेशों से आयात (Import) करता है. भारत में गैस की कीमतें ‘सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस’ (Saudi CP) से तय होती हैं, जिसे सऊदी अरामको कंपनी हर महीने तय करती है. पश्चिम एशिया में तनाव के चलते फरवरी के अंत में जैसे ही होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) का समुद्री मार्ग बंद हुआ, गैस सप्लाई चेन ठप हो गई.
फरवरी में जो एलपीजी बेंचमार्क 543 डॉलर प्रति टन था, वह जून 2026 में बढ़कर 790 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है. यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी 46% महंगी हो चुकी है, जिसके कारण प्रोपेन के दाम 39% और ब्यूटेन के दाम 52% तक बढ़ गए हैं.
पेट्रोल-डीजल पर भी हर दिन ₹600-700 करोड़ का नुकसान
पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया कि सिर्फ गैस ही नहीं, बल्कि वैश्विक संकट के कारण तेल कंपनियां इस समय डीजल पर ₹30 प्रति लीटर और पेट्रोल पर ₹6 प्रति लीटर का भारी नुकसान उठा रही हैं. इस वजह से सरकारी तेल कंपनियों को हर दिन करीब 600 से 700 करोड़ रुपये का भारी दैनिक घाटा सहना पड़ रहा है.
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