नौकरी की तलाश में बिहार के युवा नहीं करेंगे पलायन, स्टार्टअप कंपनी ने शुरू किया इंटर्नशिप प्रोग्राम

PM Internship Scheme: मिथिला स्टैक के संस्थापक निदेशक अरविंद झा ने कहा कि हम अपने संचालन को बढ़ाने के लिए स्थानीय प्रतिभाओं को प्रशिक्षित करना चाहते हैं. इसका कारण यह है कि रोजगार के अभाव में अधिकतर युवा पलायन कर बाहर जा चुके हैं. हमारा उद्देश्य बिहार की प्रतिभाओं के पलायन को रोकना है.

PM Internship Scheme: देश में युवाओं को रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना की शुरुआत कर दी है. सरकार की इस योजना में सार्वजनिक क्षेत्र के साथ-साथ निजी क्षेत्र की कंपनियां भी कदमताल मिलाकर काम कर रही हैं. सबसे खास बात यह है कि 50-100 कर्मचारियों के साथ लघु उद्यम की शुरुआत करने वाली स्टार्टअप कंपनियां भी प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम की शुरुआत कर युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में बढ़-चढ़कर भूमिका निभा रही हैं. इसी क्रम में बिहार के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए दरभंगा की स्टार्टअप कंपनी मिथिला स्टैक ने इंटर्नशिप प्रोग्राम की शुरुआत की है.

दरभंगा में दो साल में 50 लोगों की बनेगी टीम

मिथिला स्टैक दरभंगा से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और आउटसोर्सिंग सर्विस प्रोवाइड कराने वाली स्टार्टअप कंपनी है. उसने अब स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डिजिटल मार्केटिंग और दूसरी आईटी सर्विसेज में रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण और इंटर्नशिप कार्यक्रम की शुरुआत की है. दरभंगा के मब्बी में नए कार्यालय के उद्घाटन के अवसर पर मिथिला स्टेक के दरभंगा साइट प्रमुख कार्तिक झा ने कहा कि पिछले साल मिथिला स्टेक ने कई विश्व स्तरीय सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट्स सफलतापूर्वक पूरे किए हैं. इसमें निर्यात भी शामिल हैं. इस सफलता से हमें भरोसा है कि अगले दो वर्षों में हम दरभंगा में 40-50 लोगों की टीम बना सकते हैं और 2028 तक 100+ की टीम का लक्ष्य है.

पलायन रोकने के लिए शुरू किया इंटर्नशिप प्रोग्राम

आईआईटीयन, वरिष्ठ सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल और मिथिला स्टैक के संस्थापक निदेशक अरविंद झा ने कहा कि हम अपने संचालन को बढ़ाने के लिए स्थानीय प्रतिभाओं को प्रशिक्षित करना चाहते हैं. इसका कारण यह है कि रोजगार के अभाव में अधिकतर युवा पलायन कर बाहर जा चुके हैं. हमारा उद्देश्य बिहार की प्रतिभाओं के पलायन को रोकना है. इसलिए, हम एक नवाचारी प्रशिक्षण-कम-इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू कर रहे हैं, जो छात्रों, स्नातकों और नौकरी तलाशने वालों को वास्तविक परियोजनाओं के माध्यम से व्यावहारिक अनुभव दिलाएगा.

शैक्षिणिक संस्थानों के साथ समझौता

सबसे खास बात यह है कि बिहार के युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण देने के लिए मिथिला स्टैक ने क्षेत्र के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए है. इससे इन संस्थानों के छात्रों को इंटर्नशिप कार्यक्रम का लाभ मिल सकेगा. इनमें दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, वीमेन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दरभंगा, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज सुपौल, संदीप यूनिवर्सिटी मधुबनी और सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज सहरसा आदि शामिल हैं.

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इंटर्नशिप के दौरान मिलेगा वेतन

दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्राचार्य संदीप तिवारी ने कहा कि मिथिला स्टैक के इस कदम से हमारे छात्रों को वास्तविक परियोजनाओं के जरिए रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे. मिथिला स्टैक का यह प्रशिक्षण-कम-इंटर्नशिप कार्यक्रम चयनित उम्मीदवारों को वेतन-युक्त इंटर्नशिप का अवसर प्रदान करता है. जिनका स्तर आवश्यक मानकों तक नहीं पहुंचता, उन्हें 3-6 महीने के सशुल्क प्रशिक्षण के बाद इंटर्नशिप में परिवर्तित किया जाता है.

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2028 तक 100 से अधिक कर्मचारियों की टीम बनाने का लक्ष्य

मिथिला स्टैक के संस्थापक निदेशक अरविंद झा ने कहा कि मिथिला स्टेक का नया कार्यालय दरभंगा स्थित मब्बी में 2200+ वर्ग फुट क्षेत्र में है. इसमें 50 कर्मचारियों की क्षमता है. फिलहाल, कंपनी में दरभंगा और अन्य दूरस्थ स्थानों से कुल 10 कर्मचारी हैं. कंपनी का लक्ष्य 2026 तक 40-50 और 2028 तक 100 से अधिक कर्मचारियों की टीम बनाना है, जिनमें अधिकांश दरभंगा में होंगे.

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लेखक के बारे में

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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