Breaking News : पेट्रोल और डीजल के मूल्य में तीन रुपये की वृद्धि, नई दर 15 जून से ही प्रभावी

कर्नाटक में पेट्रोल-डीजल की कीमत में तीन रुपए की वृद्धि की गई है.

Petrol Diesel price : कर्नाटक में पेट्रोल और डीजल के मूल्य में तीन रुपये की वृद्धि गई की है. राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल की कीमत में तीन रुपए की और डीजल की कीमत में 3.02 रुपए की वृद्धि की जा रही है. पेट्रोल-डीजल की कीमत में बढ़ोतरी से आम लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा. कर्नाटक में पेट्रोल की कीमत लगभग 100 सौ रुपए है, इस लिहाज से अब पेट्रोल वहां लगभग 103 रुपए प्रति लीटर की रेट पर मिलेगा. वहीं डीजल की कीमत 85. 93 रुपए थी, जो अब बढ़कर 88.95 रुपए हो जाएगी.

सेल्स टैक्स में वृद्धि

कर्नाटक सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में यह बताया गया है कि सरकार ने टैक्स में वृद्धि की है, जिसकी वजह से पेट्रोल 3 रुपए और डीजल 3.02 रुपए महंगा हो जाएगा. सरकार ने पेट्रोल पर सेल्स टैक्स को 25.92 से बढ़ाकर 29.प्रतिशत कर दिया है. वहीं डीजल पर यह टैक्स 14.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 18.4 प्रतिशत कर दिया है. प्रदेश सरकार ने वित्त विभाग ने 15 जून को यह अधिसूचना जारी की है और पेट्रोल-डीजल की कीमत में वृद्धि आज से ही प्रभावी हो गई है.

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बीजेपी ने कसा तंज

कर्नाटक में पेट्रोल-डीजल की कीमत में वृद्धि पर बीजेपी प्रवक्ता एस प्रकाश ने कहा कि यह बढ़ोतरी आम आदमी पर अतिरिक्त बोझ डालेगी. उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने चुनाव खत्म होने के साथ ही डीजल और पेट्रोल की कीमतों में भारी वृद्धि करके आम आदमी पर अतिरिक्त भार डाला है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आम आदमी तो वादे के अनुसार अपने बैंक खातों में 8500 रुपये की उम्मीद कर रहा था, इसके विपरीत उनपर अतिरिक्त बोझ पड़ गया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आर्थिक रूप से दिवालिया हो गई है, यही वजह है कि वे कहीं से भी और कुछ भी करके राजस्व जमा करने की कोशिश कर ही है.

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Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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