पतंजलि आयुर्वेद अब सिर्फ FMCG और आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स तक सीमित नहीं रहेगा. कंपनी जल्द ही जनरल इंश्योरेंस सेक्टर में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा सकती है. इसकी वजह है कि बीमा नियामक IRDAI ने पतंजलि आयुर्वेद और धर्मपाल सत्यपाल (DS) ग्रुप को मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी दे दी है. करीब 4,500 करोड़ रुपये की इस डील के पूरा होने के बाद पतंजलि इंश्योरेंस कारोबार में भी एंट्री कर लेगा. यह मंजूरी तीन महीने के लिए वैध रहेगी और इसी दौरान पूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
नई कंपनी शुरू करने के बजाय खरीदने का फैसला क्यों?
पतंजलि ने नई इंश्योरेंस कंपनी का लाइसेंस लेने के बजाय पहले से काम कर रही कंपनी को खरीदने का रास्ता चुना है. इससे उसे शुरुआत से नेटवर्क खड़ा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. मैग्मा जनरल इंश्योरेंस पहले से मोटर, हेल्थ, प्रॉपर्टी और कमर्शियल इंश्योरेंस में काम कर रही है, इसलिए पतंजलि को तैयार बिजनेस प्लेटफॉर्म मिलेगा.
डील में किसे कितनी हिस्सेदारी मिलेगी?
डील पूरी होने के बाद शेयरहोल्डिंग कुछ इस तरह होगी—
| खरीदार | हिस्सेदारी |
| पतंजलि आयुर्वेद | 73.56% |
| DS ग्रुप | 24.5% |
दोनों कंपनियां मिलकर करीब 98% हिस्सेदारी पर नियंत्रण हासिल करेंगी. फिलहाल कंपनी की प्रमुख हिस्सेदार सनोटी प्रॉपर्टीज LLP (आदार पूनावाला ग्रुप) है. सभी औपचारिकताएं (formalities) पूरी होने के बाद मैग्मा जनरल इंश्योरेंस का मालिकाना हक नए प्रमोटर्स के पास चला जाएगा.
मैग्मा जनरल इंश्योरेंस कितनी मजबूत कंपनी है?
पतंजलि जिस कंपनी में निवेश कर रही है, उसका कारोबार पहले से लगातार बढ़ रहा है.
- FY26 में ग्रॉस रिटन प्रीमियम 3,615.48 करोड़ रुपये रहा.
- FY25 में यह 3,334.40 करोड़ रुपये था.
- कंपनी मोटर, हेल्थ, प्रॉपर्टी और कमर्शियल इंश्योरेंस में काम करती है.
- इसके पास हजारों एजेंट, कॉर्पोरेट ग्राहक, फाइनेंशियल पार्टनर्स और ऑटोमोबाइल कंपनियों का मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क है.
करीब 16 महीने बाद क्यों मिली मंजूरी?
इस सौदे की शुरुआत मार्च 2025 में हुई थी, जब खरीदार समूह और मौजूदा शेयरधारकों के बीच शेयर परचेज एग्रीमेंट (SPA) पर हस्ताक्षर हुए. इसके बाद मामला नियामकीय मंजूरी के लिए लंबी समीक्षा प्रक्रिया में रहा. अब IRDAI की मंजूरी मिलने के बाद खरीदार समूह को अगले तीन महीने के भीतर शेयर ट्रांसफर और बाकी सभी कानूनी व नियामकीय शर्तें पूरी करनी होंगी.
इस अधिग्रहण के साथ पतंजलि पहली बार वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में कदम रखने जा रही है. यानी जिस ब्रांड को लोग अब तक रोजमर्रा के सामान के लिए जानते थे, वही आने वाले समय में जनरल इंश्योरेंस के बाजार में भी अपनी पहचान बनाने की कोशिश करेगा.
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