तेल के खेल में नया मोड़, UAE के बाहर होते ही OPEC+ ने दिखाई दरियादिली, अब बढ़ेगा प्रोडक्शन

OPEC+ Oil Production Increase: ईरान युद्ध के कारण तेल सप्लाई बाधित होने पर ओपेक+ ने उत्पादन बढ़ाने का ऐलान किया है. यूएई के जाने के बाद संगठन अब मार्केट को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है.

OPEC+ Oil Production Increase: ग्लोबल ऑयल मार्केट से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. यूएई (UAE) के ओपेक (OPEC) से बाहर निकलने के बाद, अब संगठन के सात प्रमुख देशों ने कच्चे तेल के उत्पादन को बढ़ाने का फैसला किया है. रविवार को हुई एक वर्चुअल मीटिंग में सऊदी अरब और रूस जैसे दिग्गज देशों ने तय किया है कि वे जून 2026 से मार्केट में तेल की सप्लाई बढ़ाएंगे.

क्यों लिया गया उत्पादन बढ़ाने का फैसला?

1 मई को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के ओपेक छोड़ने के बाद संगठन के भीतर काफी हलचल थी. इसके तुरंत बाद सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने मिलकर एक बैठक की. इन देशों ने फैसला किया है कि वे जून 2026 से रोजाना 1,88,000 बैरल अतिरिक्त तेल का उत्पादन करेंगे. यह कदम उन स्वैच्छिक कटौतियों (Voluntary Cuts) में बदलाव का हिस्सा है, जिसका ऐलान पहली बार अप्रैल 2023 में किया गया था. सरल शब्दों में कहें तो, ये देश अब बाजार में तेल की कमी को दूर करने के लिए अपनी ‘कैप’ (सीमा) बढ़ा रहे हैं.

बाजार की कीमतों पर क्या होगा असर?

28 फरवरी से शुरू हुए ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों से होने वाली तेल की सप्लाई पहले से ही संकट में है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz), जो दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्ता है, फिलहाल बंद है. ऐसे में तेल की ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है. ओपेक+ के इन सात देशों का मानना है कि उत्पादन बढ़ाकर बाजार में स्थिरता लाई जा सकती है. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि वे बाजार की स्थिति पर नजर रखेंगे. अगर जरूरत पड़ी तो इस बढ़ोतरी को रोका या बदला भी जा सकता है.

क्या ज्यादा उत्पादन से भरपाई हो पाएगी?

इस फैसले के पीछे एक मकसद ओवरप्रोडक्शन की भरपाई करना भी है. जनवरी 2024 के बाद से जिन देशों ने तय सीमा से ज्यादा तेल निकाला है, उन्हें अब इसकी भरपाई करने का मौका मिलेगा. इन सातों देशों ने साफ किया है कि वे ‘डिक्लेरेशन ऑफ को-ऑपरेशन’ के नियमों का पूरी तरह पालन करेंगे. इसकी निगरानी के लिए ‘जॉइंट मिनिस्ट्रियल मॉनिटरिंग कमेटी’ को जिम्मेदारी दी गई है, जो यह सुनिश्चित करेगी कि हर देश अपनी जिम्मेदारी निभाए.

आगे की रणनीति क्या होगी?

ओपेक देशों की अगली बड़ी बैठक 7 जून को होने वाली है. अब से ये देश हर महीने मीटिंग करेंगे ताकि यह देखा जा सके कि मार्केट में तेल के दाम और सप्लाई की स्थिति कैसी है. इनका रुख अभी वेट एण्ड वॉच वाला है, क्योंकि युद्ध की वजह से हालात कभी भी बदल सकते हैं. फिलहाल, उत्पादन बढ़ाने का यह फैसला दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक राहत भरी खबर हो सकती है, जिससे पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगने की उम्मीद है. 

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लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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