Edible Oil Market : मई के पहले सप्ताह में खाद्य तेलों की घरेलू कीमतों में बदलाव का मुख्य कारण औद्योगिक मांग और आयात शुल्क में हुई वृद्धि रही। उत्तर भारत में सरसों तेल की बढ़ती लोकप्रियता ने इसकी कीमतों को सहारा दिया है।
सरसों तेल-तिलहन: कम कीमत बनी तेजी का आधार
सरसों तेल वर्तमान में सोयाबीन तेल की तुलना में उत्तर भारत (दिल्ली-हरियाणा) में 12-14 रुपये प्रति किलो सस्ता है. इस वजह से कम आय वर्ग के उपभोक्ताओं में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है.
- स्टॉक की जरूरत: विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को भविष्य की किल्लत से बचने के लिए सरसों का बफर स्टॉक बनाना चाहिए.
- सावधानी: बाजार में सटोरिये सक्रिय हैं जो किसानों को गुमराह कर सस्ते में फसल खरीदने की कोशिश कर रहे हैं.
सोयाबीन और पाम तेल: मांग और शुल्क का असर
- सोयाबीन: सोयाबीन के तेल-रहित खल (DOC) की भारी मांग के कारण सोयाबीन तिलहन की कीमतों में सुधार हुआ. हालांकि, आयातकों द्वारा कम दाम पर बिकवाली करने से सोयाबीन तेल की कीमतें स्थिर रहीं.
- पाम तेल: गर्मियों में औद्योगिक मांग बढ़ने और सरकार द्वारा आयात शुल्क (Import Duty) में वृद्धि (CPO पर ₹44/क्विंटल और पामोलीन पर ₹94/क्विंटल) करने से इनकी कीमतों में मजबूती आई.
मूंगफली तेल: ऊंची कीमतों ने बिगाड़ा खेल
महंगा होने के कारण मूंगफली तेल की मांग कमजोर रही, जिससे इसके भाव गिर गए। वर्तमान में मूंगफली के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से भी नीचे चल रहे हैं.
| तेल-तिलहन का प्रकार | वर्तमान भाव (प्रति क्विंटल/टिन) | साप्ताहिक बदलाव |
| सरसों दाना | ₹7,000 – ₹7,025 | +₹160 (सुधार) |
| सरसों तेल (दादरी) | ₹14,350 | +₹150 (सुधार) |
| सोयाबीन दाना | ₹6,525 – ₹6,575 | +₹375 (सुधार) |
| सोयाबीन तेल (दिल्ली) | ₹16,000 | स्थिर |
| पामोलीन (दिल्ली) | ₹15,450 | +₹100 (सुधार) |
| मूंगफली तिलहन | ₹6,650 – ₹7,125 | -₹100 (गिरावट) |
| मूंगफली तेल (गुजरात) | ₹15,750 | -₹250 (गिरावट) |
| बिनौला तेल | ₹15,100 | +₹150 (सुधार) |
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