ऑनलाइन गेमिंग से की कमाई तो जाना होगा सीधा जेल, 1 करोड़ का जुर्माना! राष्ट्रपति से मिली कानून को मंजूरी

Online Gaming Ban: ऑनलाइन मनी गेमिंग पर बड़ी कार्रवाई! संसद से पारित और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मंजूरी मिलने के बाद ऑनलाइन गेमिंग प्रमोशन एंड रेगुलेशन बिल 2025 अब कानून बन गया है. इसके तहत ऑनलाइन मनी गेमिंग सेवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा. ऐसे गेम उपलब्ध कराने वालों को तीन साल तक जेल और एक करोड़ रुपये जुर्माना होगा. वहीं, प्रचार करने वालों को दो साल की सजा और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा. ड्रीम11, विंजो जैसे प्लेटफॉर्म्स ने परिचालन बंद किया.

Online Gaming Ban: भारत में ऑनलाइन मनी गेमिंग पर रोक लगाने वाले ऑनलाइन गेमिंग प्रमोशन एंड रेगुलेशन बिल 2025 को संसद से पारित होने के बाद शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की भी मंजूरी मिल गई. इस कानून के लागू होने के साथ ही देशभर में सभी ऑनलाइन मनी गेमिंग सेवाओं पर प्रतिबंध लग जाएगा. अब ऐसे गेम उपलब्ध कराने वालों को तीन साल तक की जेल और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना भुगतना होगा.

प्रचार पर भी होगी कड़ी सजा और जुर्माना

नए कानून के अनुसार, केवल ऑनलाइन मनी गेमिंग प्लेटफार्म चलाना ही अपराध नहीं होगा, बल्कि इसका प्रचार करना भी गंभीर अपराध माना जाएगा. ऐसे किसी भी प्लेटफार्म का विज्ञापन या प्रचार करने वालों को दो साल तक की सजा और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा. इस प्रावधान को शामिल कर सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इस सामाजिक बुराई पर पूरी तरह अंकुश लगाना चाहती है.

संसद में तेजी से पास हुआ बिल

इस बिल को पारित करने में संसद के दोनों सदनों ने बहुत तेजी दिखाई. राज्यसभा ने महज 26 मिनट और लोकसभा ने केवल सात मिनट में इस विधेयक को पारित कर दिया. यह बताता है कि राजनीतिक दलों में इस मुद्दे को लेकर व्यापक सहमति रही और सभी ने मिलकर इसे समाजहित में आवश्यक माना.

अश्विनी वैष्णव ने बताया समाजिक बुराई

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में कहा कि ऑनलाइन मनी गेमिंग समाज के लिए एक गंभीर बुराई बन चुकी है. उन्होंने बताया कि लोग इन खेलों के चक्कर में अपनी पूरी जीवनभर की जमा पूंजी गवां रहे हैं. वैष्णव ने कहा, “समय-समय पर समाज बुराइयों से जूझता है. ऐसे में सरकार और संसद का यह कर्तव्य है कि वे इनकी जांच करें और इन्हें नियंत्रित करने के लिए कानून बनाएं.”

प्रधानमंत्री मोदी की दृष्टि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस विधेयक का समर्थन करते हुए कहा था कि यह कानून देश में ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा देगा, लेकिन उन ऑनलाइन गेम्स को रोक देगा, जिनका सीधा असर लोगों की आर्थिक स्थिति और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. मोदी ने इस कानून को समाज को हानिकारक प्रवृत्तियों से बचाने की दिशा में बड़ा कदम बताया.

कई कंपनियों ने किया परिचालन बंद करने का ऐलान

नए कानून का असर तुरंत देखने को मिला. ड्रीम11 और विंजो जैसे कई लोकप्रिय ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफार्मों ने घोषणा कर दी है कि वे अपना परिचालन बंद कर देंगे. इन कंपनियों ने कहा कि नए कानून की सख्ती के बाद वे अपनी सेवाएं अब भारत में जारी नहीं रख सकते.

सरकार कर रही है विशेष प्रावधानों पर विचार

आईटी सचिव एस कृष्णन ने संकेत दिया है कि सरकार कानून को लागू करने के बाद इसके प्रावधानों की समय-समय पर समीक्षा करेगी. उन्होंने कहा, “यह ऐसा कानून नहीं है, जिसे हम स्थिर रख दें. हम इस पर विचार कर रहे हैं कि क्या कुछ प्रतिबंधों को अन्य धाराओं से पहले लागू करना संभव है, क्योंकि विधेयक में इस संबंध में कोई विशिष्ट नियम नहीं हैं.”

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समाज को राहत देने वाला कदम

इस नए कानून से उन लाखों परिवारों को राहत मिलेगी, जो ऑनलाइन मनी गेमिंग की वजह से आर्थिक और मानसिक तनाव झेल रहे थे. सरकार का यह कदम एक ओर जहां जिम्मेदार डिजिटल वातावरण बनाने की ओर इशारा करता है. वहीं, दूसरी ओर यह भारत को ऑनलाइन गेमिंग की खतरनाक प्रवृत्तियों से मुक्त करने की दिशा में एक मजबूत पहल है.

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लेखक के बारे में

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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