पेंशन की टेंशन खत्म, NPS के इन 2 तरीकों से हर महीने पाएं फिक्स सैलरी

NPS Retirement Income Options: NPS के नए नियमों से अब रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम पाना हुआ आसान. जानें क्या हैं SLW और SUR विड्रॉल ऑप्शन और आपके भविष्य के लिए कौन सा तरीका सबसे बेस्ट है.

NPS Retirement Income Options: रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि हर महीने खर्चे के लिए पैसे कहां से आएंगे. नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) अब सिर्फ पैसा जोड़ने का जरिया नहीं रहा, बल्कि इससे रेगुलर इनकम पाना भी आसान हो गया है. हाल ही में आए नए नियमों के बाद अब आप अपने रिटायरमेंट फंड को अपनी जरूरत के हिसाब से निकाल सकते हैं. 

क्या है NPS का नया ‘पेंशन प्लान’?

NPS में अब आपको ‘सिस्टमैटिक विड्रॉल’ (Systematic Withdrawal) की सुविधा मिलती है. इसका आसान मतलब यह है कि रिटायरमेंट के समय आपको सारा पैसा एक साथ निकालने की जरूरत नहीं है. आप एक तय अंतराल (जैसे हर महीने या हर तीन महीने) पर थोड़ा-थोड़ा पैसा निकाल सकते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि जो पैसा आप नहीं निकालते, वह मार्केट में निवेश रहता है और उस पर आपको रिटर्न मिलता रहता है. 

SLW: हर महीने फिक्स रकम चाहिए?

अगर आप चाहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद आपके हाथ में हर महीने एक बंधी-बंधाई रकम आए, तो सिस्टमैटिक लम्प सम विड्रॉल (SLW) आपके लिए बेस्ट है. 

  • कैसे काम करता है: इसमें आप तय कर लेते हैं कि आपको हर महीने, मान लीजिए 10,000 रुपये चाहिए. 
  • फायदा: सिस्टम हर महीने आपकी उतनी ही यूनिट्स बेचेगा जिससे आपको 10,000 रुपये मिल जाएं.  इसमें आपको पता होता है कि जेब में कितना पैसा आएगा, जिससे बजट बनाना आसान हो जाता है. 

SUR: क्या यूनिट्स के हिसाब से पैसा निकालना सही है?

दूसरा ऑप्शन है सिस्टमैटिक यूनिट रिडेम्पशन (SUR). यह उन लोगों के लिए है जो मार्केट की चाल को समझते हैं और यूनिट्स के आधार पर चलना चाहते हैं.

  • कैसे काम करता है: यहां आप रुपयों के बजाय ‘यूनिट्स’ तय करते हैं. जैसे- आपने तय किया कि हर महीने 100 यूनिट्स बेचनी हैं. 
  • नुकसान/फायदा: चूंकि मार्केट हर दिन घटता-बढ़ता है (NAV बदलती रहती है), इसलिए हर महीने मिलने वाली रकम कम या ज्यादा हो सकती है. अगर NAV ऊपर है तो ज्यादा पैसे मिलेंगे, और अगर मार्केट गिरा है तो पैसे कम मिलेंगे. 

आपके लिए कौन सा तरीका बेहतर है?

रिटायरमेंट के बाद ‘निश्चित आय’ (Fixed Income) ज्यादा जरूरी होती है, इसलिए ज्यादातर लोग SLW को पसंद करते हैं. वहीं, SUR उन लोगों के लिए ठीक है जो अपने पोर्टफोलियो को यूनिट्स के हिसाब से बैलेंस करना चाहते हैं. 

ध्यान रहे, NPS से पैसा निकालते समय टैक्स के नियमों और अपनी भविष्य की जरूरतों को जरूर देखें. ये दोनों ही तरीके आपको एक साथ सारा पैसा खर्च कर देने की गलती से बचाते हैं और लंबे समय तक आपकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं. अपनी लाइफस्टाइल और जरूरतों के हिसाब से सही ऑप्शन चुनना ही समझदारी है. 

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लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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