Ratan Tata Heir: रतन टाटा के मिल गए वारिस, बनाए गए टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन

Ratan Tata Heir: रतन टाटा के मिल गए वारिस, बनाए गए टाटा ट्रस्ट के चेयरमैनरतन टाटा के निधन के बाद, उनके सौतेले भाई नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट्स का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. उन्होंने टाटा समूह में चार दशकों तक नेतृत्व किया है और अब सर रतन टाटा ट्रस्ट व सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट का नेतृत्व करेंगे, जो समूह के परोपकारी कार्यों को संचालित करते हैं.

Ratan Tata Heir: रतन टाटा के निधन के बाद, उनके सौतेले भाई नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट्स का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. बुधवार को मुंबई में एक बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया. नोएल टाटा अब टाटा समूह की सबसे महत्वपूर्ण धर्मार्थ संस्थाओं, सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के प्रमुख बन गए हैं. इससे पहले नोएल इन संस्थाओं में एक ट्रस्टी के रूप में शामिल थे, लेकिन अब उन्हें चेयरमैन की जिम्मेदारी सौंपी गई है. रतन टाटा के जीवन में इन ट्रस्ट्स की स्थापना और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका रही है. टाटा ट्रस्ट्स टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा सन्स (Tata Sons) का बड़ा हिस्सा रखते हैं, जिसमें करीब 66% हिस्सेदारी है.

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नोएल टाटा की भूमिका और नई जिम्मेदारियां

नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन की जिम्मेदारी सौंपे जाने से पहले भी उनकी भूमिका टाटा समूह में काफी महत्वपूर्ण रही है. वे पिछले कई वर्षों से टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड के चेयरमैन हैं, जो टाटा समूह की एक प्रमुख कंपनी है. इसके अलावा, नोएल का टाटा समूह के साथ चार दशकों का लंबा इतिहास है, और उन्होंने कई प्रमुख कंपनियों में नेतृत्व किया है. वे ट्रेंट, वोल्टास और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन जैसी कंपनियों के चेयरमैन भी हैं. साथ ही, टाटा स्टील और टाइटन कंपनी लिमिटेड जैसी कंपनियों में उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य कर रहे हैं.

नोएल टाटा की नई जिम्मेदारी उन्हें टाटा समूह के दो सबसे महत्वपूर्ण ट्रस्ट्स, सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट, का चेयरमैन बनाती है. इन ट्रस्ट्स के माध्यम से टाटा समूह न केवल अपनी व्यावसायिक गतिविधियों को संचालित करता है, बल्कि समाज के प्रति परोपकारी पहलों और शासन की देखरेख भी करता है. टाटा ट्रस्ट्स भारत के सबसे पुराने और सबसे बड़े धर्मार्थ संगठनों में से एक हैं, और इनके माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम किया जाता है.

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टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका और महत्ता

टाटा ट्रस्ट्स टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा सन्स का 66% हिस्सा रखते हैं, और ये ट्रस्ट्स समूह के शासन और रणनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसके साथ ही, टाटा ट्रस्ट्स भारत में समाज सेवा और परोपकारी कार्यों में भी अग्रणी हैं. इन ट्रस्ट्स के माध्यम से टाटा समूह ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कला और संस्कृति, पर्यावरण, और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा ट्रस्ट्स ने इन पहलों को बढ़ावा दिया और इन्हें न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया भर में एक पहचान दिलाई. उनके योगदान से टाटा समूह ने अपने व्यवसाय के साथ-साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी हमेशा महत्व दिया है. नोएल टाटा को चेयरमैन बनाए जाने के बाद, उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे इस परंपरा को आगे बढ़ाएंगे और ट्रस्ट्स के संचालन को नए आयाम देंगे.

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नोएल टाटा की विरासत और नेतृत्व

नोएल टाटा का टाटा समूह के साथ गहरा और लंबा संबंध है. उन्होंने ट्रेंट, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन और वोल्टास जैसी कंपनियों में सफलतापूर्वक नेतृत्व किया है. वे टाटा स्टील और टाइटन कंपनी में भी उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं. इन विभिन्न भूमिकाओं के माध्यम से नोएल ने व्यापारिक मामलों में अपनी मजबूत पकड़ साबित की है और अब टाटा ट्रस्ट्स के नेतृत्व में भी वही अनुभव लेकर आ रहे हैं.

नोएल टाटा की नियुक्ति से यह साफ है कि टाटा ट्रस्ट्स को एक स्थिर और अनुभवी नेतृत्व मिलेगा, जो रतन टाटा की विरासत को आगे बढ़ाएगा और नए युग में टाटा ट्रस्ट्स को एक मजबूत दिशा देगा. टाटा समूह के साथ उनके चार दशकों के अनुभव के आधार पर, नोएल टाटा का नेतृत्व ट्रस्ट्स और समूह के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा.

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लेखक के बारे में

Published by: Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

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अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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