1 अप्रैल से HRA क्लेम के बदल जाएंगे नियम, अब मकान मालिक के साथ रिश्ता बताना होगा जरूरी

New HRA Claim Rules: सरकार ने नए आयकर अधिनियम, 2025 का ड्राफ्ट जारी कर दिया है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा. नए नियमों के तहत अब HRA क्लेम करने पर मकान मालिक से रिश्ते का खुलासा करना अनिवार्य होगा. इसका मुख्य उद्देश्य फर्जी टैक्स दावों को रोकना और सिस्टम में पारदर्शिता लाना है.

New HRA Claim Rules: सरकार ने नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत ड्राफ्ट आयकर नियम और फॉर्म जारी कर दिए हैं. इन प्रस्तावों का मकसद कर अनुपालन को अधिक पारदर्शी बनाना, फर्जी दावों पर रोक लगाना और ऑडिटर व कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाना है. यह जानकारी समाचार एजेंसी भाषा से मिली है. नया कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा. स्टेकहोल्डर से सुझाव लेने के बाद अंतिम नियम और फॉर्म अगले महीने अधिसूचित किए जाएंगे.

HRA दावों पर सरकार की कड़ी नजर

ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, प्रस्तावित नए फॉर्म 124 में करदाता को यह स्पष्ट करना होगा कि जिस मकान मालिक को वह किराया दे रहा है, उससे उसका कोई पारिवारिक या अन्य संबंध तो नहीं है. अभी तक HRA का दावा करते समय कर्मचारी को केवल किराये का विवरण देता है, मकान मालिक से संबंध का खुलासा अनिवार्य नहीं था. कर विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए किराया दावों पर प्रभावी रोक लगेगी.

क्या है एक्स्पर्ट्स कि राय

Nangia Global Advisors के साझेदार Sandeep Jhunjhunwala के अनुसार, यह प्रावधान वास्तविक व्यवस्थाओं को प्रभावित किए बिना झूठे दावों की पहचान में मदद करेगा. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनुचित दावों को खारिज करना आसान होगा.

ऑडिटर और कंपनियों की जवाबदेही बढ़ेगी

ड्राफ्ट नियमों में विदेशी आय पर टैक्स क्रेडिट (एफटीसी) के दावों को लेकर ऑडिटर के साथ-साथ कंपनियों की जिम्मेदारी भी बढ़ाने का प्रस्ताव है. प्रस्तावित फॉर्म 44 में चार्टर्ड अकाउंटेंट को विदेशी टैक्स कटौती प्रमाणपत्र, भुगतान का प्रमाण, विनिमय दर रूपांतरण और कर संधि की पात्रता की स्वतंत्र जांच करनी होगी. एक्स्पर्ट्स का कहना है कि जहां विदेशी देशों में एकीकृत टैक्स स्टेटमेंट जारी होते हैं या कर अलग वित्त वर्ष में चुकाया जाता है, वहां यह प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण हो सकती है.

कंपनियों के लिए पैन आवेदन प्रक्रिया होगी सख्त

ड्राफ्ट प्रस्ताव में कंपनियों के पैन आवेदन को लेकर भी सख्ती की गई है. अब आवेदन के समय यह घोषणा देना अनिवार्य होगा कि कंपनी के पास पहले से कोई पैन नहीं है. शाखाओं, परियोजना कार्यालयों या पूर्ववर्ती इकाइयों के नाम पर पैन होने की स्थिति में दोहराव से बचने के लिए आंतरिक जांच जरूरी होगी. विशेषज्ञों के अनुसार, इससे डेटाबेस की शुचिता मजबूत होगी, हालांकि आवेदकों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी.

कर ऑडिट रिपोर्ट में ज्यादा खुलासे अनिवार्य

नए कर ऑडिट फॉर्म 26 के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि यदि वैधानिक ऑडिटर की रिपोर्ट में कोई प्रतिकूल टिप्पणी, अस्वीकरण या पात्रता है, तो उसका आय, हानि या बुक प्रॉफिट पर प्रभाव स्पष्ट रूप से बताया जाए. उदाहरण के तौर पर, राजस्व मान्यता, शेयर मूल्यांकन या प्रावधानों में कमी पर आपत्ति होने की स्थिति में यह देखना होगा कि उससे कर-योग्य आय को कम तो नहीं दिखाया गया है.

आईटी सिस्टम और डेटा स्टोरेज का भी देना होगा ब्योरा

कर ऑडिट रिपोर्ट में अब इस्तेमाल किए गए अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर, क्लाउड या सर्वर का विवरण, आईपी पता, डेटा भंडारण का देश और भारत में स्थित बैकअप सर्वर का पता भी दर्ज करना होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि नए प्रावधानों से कंपनियों और करदाताओं की अनुपालन लागत बढ़ सकती है, लेकिन लंबे समय में इससे कर व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता को मजबूती मिलेगी.

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लेखक के बारे में

By Anshuman Parashar

अंशुमान पराशर पिछले दो वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के लिए बिजनेस की लेटेस्ट खबरों पर काम कर रहे हैं. इसे पहले बिहार की राजनीति, अपराध पर भी इन्होंने खबरें लिखी हैं. बिहार विधान सभा चुनाव 2025 में इन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और विस्तृत राजनीतिक कवरेज किया है.

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