महाराष्ट्र की ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना’ को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है. जांच और सत्यापन के बाद 92 लाख से अधिक महिलाओं के नाम लाभार्थी सूची से हटा दिए गए हैं. इसके चलते इन महिलाओं को योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता बंद हो गई है. सरकार और CAG की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती करीब 2.4 करोड़ लाभार्थियों की संख्या अब घटकर लगभग 1.7 करोड़ रह गई है.
e-KYC पूरा नहीं करना पड़ा भारी
लाभार्थियों के नाम हटने की सबसे बड़ी वजह e-KYC प्रक्रिया पूरी नहीं करना बताई गई है. करीब 50 से 55 लाख महिलाएं तय समय सीमा के भीतर e-KYC पूरा नहीं कर पाईं. इसके बाद उनका लाभ रोक दिया गया और नाम लाभार्थी सूची से बाहर कर दिए गए.
सत्यापन में करीब 12 लाख महिलाएं ऐसी मिलीं, जिनके परिवार की सालाना आय योजना में तय 2.5 लाख रुपये की सीमा से अधिक थी. नियमों के मुताबिक पात्रता नहीं होने के कारण इन महिलाओं को योजना से बाहर कर दिया गया.
उम्र और दूसरी योजनाएं भी बनीं वजह
करीब 4.5 लाख से अधिक महिलाएं 65 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा पार कर चुकी थीं. वहीं करीब 5 लाख महिलाओं के नाम इसलिए हटाए गए क्योंकि वे पहले से ‘नमो शेतकरी योजना’ या अन्य सरकारी आर्थिक योजनाओं का लाभ ले रही थीं.
फर्जी आवेदन भी सामने आए
सत्यापन के दौरान गलत जानकारी, फर्जी दस्तावेज और वाहन मालिक होने जैसे मामलों का भी पता चला. करीब 14 हजार पुरुषों द्वारा महिला के नाम पर कथित तौर पर गलत तरीके से योजना का लाभ लेने के मामले भी सामने आए. ऐसे नामों को भी सूची से हटा दिया गया है.
अब सिर्फ पात्र महिलाओं को मिलेगा लाभ
सरकार की कार्रवाई का उद्देश्य योजना का लाभ केवल पात्र महिलाओं तक पहुंचाना बताया जा रहा है. लाभार्थियों को सलाह दी गई है कि वे अपना e-KYC और पात्रता संबंधी जानकारी जांच लें, ताकि किसी गलती की वजह से उनका लाभ न रुके.
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