Jawaharlal Nehru Salary: पंडित जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनने के बाद कितनी सैलरी मिलती थी

Jawaharlal Nehru Salary: भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को ₹3,000 सैलरी मिलती थी, लेकिन उन्होंने इसे ज्यादा मानते हुए पहले ₹2,250 और फिर ₹2,000 कर लिया. साथ ही ₹500 का इंटरटेनमेंट भत्ता भी ठुकरा दिया। यह उनके सिद्धांतों और सादगी का उदाहरण है.

Jawaharlal Nehru Salary: नया वित्तीय वर्ष 2025-26 शुरू हो चुका है. इस साल कई राज्यों में केंद्रीय कर्मचारियों का DA बढ़ा दिया गया है, तो वहीं कुछ राज्यों में विधायकों की सैलरी भी बढ़ाई गई है. सरकार ने सांसदों के भत्ते में भी बढ़ोतरी की है. अब जब हर कोई अपनी सैलरी और भत्तों में बढ़ोतरी का जश्न मना रहा है, तो एक सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है  भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को उस समय कितनी सैलरी मिलती थी?

जब पंडित नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री बने, तो उनकी मासिक सैलरी ₹3,000 तय की गई थी. सुनने में यह रकम उस समय के हिसाब से बहुत बड़ी लग सकती है, लेकिन पंडित नेहरू के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं थी. उन्होंने अपनी सैलरी में खुद ही कटौती की. पहले उन्होंने इसे ₹2,250 और फिर ₹2,000 प्रति माह कर दिया. क्यों? क्योंकि उन्हें यह ज़्यादा लगा.

1947 में जवाहरलाल नेहरू ने संसद सदस्य के रूप में शपथ ली

अब आप सोचेंगे, “इतनी सैलरी तो ठीक ही है, इसमें कोई बड़ी बात नहीं!” लेकिन यहाँ बात सिर्फ पैसे की नहीं, बल्कि सिद्धांत की है. पंडित नेहरू ने जो किया, वह शायद ही आज के किसी बड़े नेता ने किया हो. प्रधानमंत्री के तौर पर उन्हें जो ₹500 का इंटरटेनमेंट भत्ता मिलता था, वह भी उन्होंने ठुकरा दिया. जबकि आजकल के नेताओं को सरकारी धन से लाखों का खर्चा उठाने में कोई झिझक नहीं होती, नेहरू जी ने इसका पूरी तरह से विरोध किया.  उनका कहना था, “यह पैसा जनता का है, इसे व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता.”

यह दिलचस्प और चौंकाने वाली जानकारी हमें उनके निजी सचिव एम.ओ. मथाई की किताब Reminiscences of the Nehru Age से मिलती है. इस किताब में पंडित नेहरू के जीवन के कई प्रेरक पहलू उजागर होते हैं. उनका यह फैसला हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या आज के नेताओं में वही नैतिकता और कर्तव्यनिष्ठा है? क्या आज के समय में कोई नेता ऐसी सादगी और ईमानदारी दिखा सकता है?

एम. ओ. मथाई के द्वारा लिखी गई किताब

पंडित नेहरू के इस फैसले से हमें यह सिखने को मिलता है कि जब बात देश की सेवा की हो, तो व्यक्तिगत लाभ और भत्तों का कोई मतलब नहीं होता. सिर्फ देश की भलाई और सेवा मायने रखती है और यही था पंडित नेहरू का असली मंत्र. क्या आज के नेताओं को भी यह मंत्र अपनाना चाहिए?

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By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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