Presumptive Taxation Scheme: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन शुरू हो चुका है. अगर आप डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, आईटी प्रोफेशनल या इंटीरियर डेकोरेटर हैं और खुद का काम (Self-employed) करते हैं, तो टैक्स बचाने के लिए एक बेहतरीन स्कीम आपके काम आ सकती है. इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 44ADA के तहत आने वाली इस स्कीम को ‘प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन’ (Presumptive Taxation Scheme) कहते हैं. यह छोटे प्रोफेशनल्स के लिए टैक्स भरने का काम बेहद आसान बना देती है.
आइए समझते हैं कि यह स्कीम कैसे काम करती है और इसके क्या फायदे हैं.
कौन-कौन ले सकता है इसका फायदा?
यह स्कीम केवल भारत में रहने वाले (Resident) इंडिविजुअल्स, हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) और पार्टनरशिप फर्म्स के लिए है. ध्यान रखें कि लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) को इसमें शामिल नहीं किया गया है.
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसमें सिर्फ चुनिंदा प्रोफेशनल्स को ही छूट मिलती है, जैसे:
- मेडिकल और लीगल (वकील)
- इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर
- अकाउंटेंसी और टेक्निकल कंसल्टेंसी
- इंटीरियर डेकोरेशन और फिल्म आर्टिस्ट
- आईटी (IT) प्रोफेशनल्स
ब्रोकरेज, कमीशन का बिजनेस करने वाले या डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स (Youtubers/Influencers) इस स्कीम का फायदा नहीं उठा सकते.
कमाई की लिमिट क्या है?
इस स्कीम का लाभ लेने के लिए सालभर की कुल प्रोफेशनल कमाई (Gross Receipts) 50 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. हालांकि, सरकार ने इसमें एक बड़ी राहत दी है. अगर आपकी कुल कमाई में कैश (नकद) का लेनदेन 5% से कम है (यानी 95% से ज्यादा काम डिजिटल या बैंक से हुआ है), तो यह लिमिट बढ़कर 75 लाख रुपये हो जाती है. अगर कमाई 75 लाख रुपये से ऊपर जाती है, तो आपको सेक्शन 44AB के तहत टैक्स ऑडिट कराना अनिवार्य हो जाएगा.
टैक्स का हिसाब कैसे होता है?
इस स्कीम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आपको अपनी कुल कमाई का सीधा 50% हिस्सा ही टैक्सेबल इनकम (जिस पर टैक्स लगना है) मानना होता है. बाकी के 50% को आपका खर्च मान लिया जाता है.
- अकाउंट्स का झंझट खत्म: आपको रोजमर्रा के खर्चों का पूरा हिसाब-किताब (Books of Accounts) रखने की जरूरत नहीं होती.
- एडवांस टैक्स में राहत: आपको सालभर अलग-अलग किस्तों में एडवांस टैक्स देने की जरूरत नहीं है. आप 15 मार्च तक एक बार में पूरा एडवांस टैक्स चुका सकते हैं.
- चैप्टर VI-A की छूट: 50% इनकम दिखाने के बाद भी आप सेक्शन 80C जैसी टैक्स डिडक्शन का फायदा अलग से ले सकते हैं.
अगर आप अपनी टैक्स लायबिलिटी 50% से भी कम दिखाना चाहते हैं, तो आपको टैक्स ऑडिट कराना होगा. साथ ही, इस स्कीम में रहने का मतलब यह नहीं है कि स्क्रूटनी (जांच) नहीं हो सकती. इसलिए इनवॉइस, बैंक स्टेटमेंट और AIS (Annual Information Statement) संभालकर रखें.
कौन सा ITR फॉर्म भरना होगा?
असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए सेक्शन 44ADA चुनने वाले प्रोफेशनल्स को 31 अगस्त 2026 तक अपना रिटर्न फाइल करना होगा. आमतौर पर इसके लिए ITR-4 फॉर्म भरा जाता है.
लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में आप ITR-4 नहीं भर सकते, जैसे:
- अगर आपके पास अनलिस्टेड शेयर्स हैं या आप किसी कंपनी में डायरेक्टर हैं.
- अगर आपको भारी कैपिटल गेंस (Capital Gains), F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) या क्रिप्टो से कमाई हुई है.
- अगर आपके पास विदेशी संपत्ति है या एग्रीकल्चर इनकम 5,000 रुपये से ज्यादा है.
ऐसी स्थिति में आपको ITR-3 फॉर्म चुनना होगा. फाइल करने से पहले अपने GST टर्नओवर और बैंक स्टेटमेंट्स का मिलान जरूर कर लें.
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