Rupee vs Dollar : विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया आज (बुधवार) शुरुआती कारोबार में ही दबाव में नजर आया. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 31 पैसे कमजोर होकर 93.75 के स्तर पर पहुंच गया. मंगलवार को भी रुपया 28 पैसे की गिरावट के साथ 93.44 पर बंद हुआ था.
रुपये के टूटने के 4 मुख्य कारण
- पश्चिम एशिया में अनिश्चितता: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बनी संशय की स्थिति ने ग्लोबल इन्वेस्टर को डरा दिया है. इससे सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग बढ़ी है.
- कच्चे तेल की ऊंची कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 98.20 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है.
- शेयर बाजार से विदेशी पूंजी की निकासी: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया है. मंगलवार को उन्होंने 1,918.99 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिसका सीधा असर रुपये की सेहत पर पड़ा.
- घरेलू शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही आज लाल निशान में खुले, जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर हुआ.
| इंडेक्स / कमोडिटी | ताजा स्तर | बदलाव |
| रुपया vs डॉलर | 93.75 | -31 पैसे |
| डॉलर इंडेक्स | 98.21 | -0.01% |
| ब्रेंट क्रूड | $98.20 | -0.28% |
| सेंसेक्स | 78,910.55 | -362.78 अंक |
| निफ्टी | 24,485.90 | -90.70 अंक |
विशेषज्ञों की राय
विदेशी मुद्रा कारोबारियों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में शांति वार्ता के ठोस नतीजे सामने नहीं आते, तब तक कच्चे तेल की कीमतें और डॉलर का मजबूत होना जारी रह सकता है. डॉलर इंडेक्स का 98.21 के स्तर पर होना यह दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी मुद्रा अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले काफी मजबूत स्थिति में है.
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