RBI का बड़ा, रुपये पर सट्टेबाजी के प्रतिबंध हटाए ,मार्केट में डीलर्स फिर कर सकेंगे ट्रेड

RBI Relaxes Rupee Derivative Rules: RBI ने रुपये की अस्थिरता थामने के लिए लगाए गए प्रतिबंध हटाए. अब फॉरेक्स डीलर्स ऑफशोर NDF मार्केट में फिर से पोजीशन ले सकेंगे. जानिए क्या होंगे नए नियम और बाजार पर इसका असर.

RBI Relaxes Rupee Derivative Rules: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये में अत्यधिक अस्थिरता को रोकने के लिए विदेशी मुद्रा डीलरों पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों को वापस लेने का ऐलान किया है. गवर्नर संजय मल्होत्रा के पिछले संकेतों के अनुरूप, केंद्रीय बैंक ने अब डीलर्स को ऑफशोर नॉन-डेलिवरेबल फॉरवर्ड मार्केट (NDF) में फिर से पोजीशन लेने की अनुमति दे दी है.

नए नियमों में क्या बदला ?

RBI द्वारा जारी ताजा निर्देशों के अनुसार, बाजार में अब निम्नलिखित बदलाव प्रभावी होंगे:

  • NDF कॉन्ट्रैक्ट्स: अधिकृत डीलर (Authorized Dealers) अब रेजिडेंट और नॉन-रेजिडेंट यूजर्स को रुपये से जुड़े नॉन-डेलिवरेबल डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स ऑफर कर सकेंगे.
  • रीबुकिंग की अनुमति: बैंक अब यूजर्स को रुपये से जुड़े किसी भी फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को रीबुक करने की अनुमति दे सकते हैं. यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है.
  • नेट ओपन पोजीशन: बैंकों को प्रत्येक कारोबारी दिन के अंत में अपनी नेट ओपन पोजीशन को 10 करोड़ डॉलर ($100 Million) तक सीमित रखना होगा.

मार्च में क्यों लगी थी पाबंदी ?

यह पाबंदी मार्च के अंत में अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान उपजे संकट के कारण लगाई गई थी. उस समय:

  • ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार निकल गई थीं.
  • रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर की ओर गिर रहा था.
  • सट्टेबाजों ने आर्बिट्राज मार्केट में भारी पोजीशन बना ली थी, जिससे रुपये की अस्थिरता बढ़ रही थी. सख्ती का नतीजा यह रहा कि 10 अप्रैल तक बैंकों ने लगभग $40 बिलियन के सट्टा ट्रेड को खत्म कर दिया था.

रुपये की स्थिति और RBI का विजन

गवर्नर मल्होत्रा के अनुसार, ये उपाय केवल अस्थायी थे ताकि बाजार को अनावश्यक झटकों से बचाया जा सके. इन कदमों की मदद से रुपया डॉलर के मुकाबले 95.21 के रिकॉर्ड निचले स्तर से संभलने में कामयाब रहा है. इन पाबंदियों को हटाना भारतीय करेंसी के अंतरराष्ट्रीयकरण (Internationalization) और भारतीय बाजारों को वैश्विक स्तर पर और अधिक गहरा बनाने की दिशा में RBI की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

क्या है NDF मार्केट ?

नॉन-डेलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) एक विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट है. इसका उपयोग उन मुद्राओं के लिए किया जाता है जिनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह से स्वतंत्र व्यापार नहीं होता (Non-convertible). इसमें अनुबंध की समाप्ति पर मुद्राओं का भौतिक आदान-प्रदान नहीं होता, बल्कि केवल नकद (Cash) अंतर का निपटान किया जाता है.

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By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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