Train Late Refund: ट्रेन तय समय से 3 घंटे या उससे ज्यादा लेट हो जाए और यात्री इस वजह से सफर नहीं करता, तो रेलवे के रिफंड नियमों के तहत पूरा किराया वापस पाने का प्रावधान है. लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होती हैं. खास बात यह है कि सिर्फ ट्रेन के 3 घंटे लेट होने से रिफंड अपने आप खाते में नहीं आता, यात्री को निर्धारित प्रक्रिया के तहत रिफंड का दावा करना होता है. हाल ही में इस्पात एक्सप्रेस के 8 घंटे 48 मिनट लेट होने पर रेलवे को एक यात्री को ₹35 हजार देने पड़े.
3 घंटे लेट होने पर कब मिलेगा 100% रिफंड?
भारतीय रेलवे के नियमों के मुताबिक, अगर ट्रेन यात्री के बोर्डिंग स्टेशन से 3 घंटे या उससे ज्यादा लेट है और यात्री ने उस ट्रेन में सफर नहीं किया है, तो निर्धारित शर्तों के तहत पूरा किराया वापस किया जा सकता है. इस स्थिति में सामान्य कैंसिलेशन चार्ज नहीं काटा जाता.
यानी अगर आपकी ट्रेन का निर्धारित समय सुबह 10 बजे है और वह 1 बजे या उसके बाद चलने की स्थिति में है, लेकिन आपने देरी के कारण यात्रा नहीं की, तो रिफंड का दावा किया जा सकता है. लेकिन यात्री ट्रेन में सवार होकर यात्रा कर लेता है, तो सिर्फ ट्रेन के 3 घंटे या उससे ज्यादा लेट होने के आधार पर इस नियम के तहत पूरा किराया वापस नहीं मिलता.
ऑनलाइन टिकट वालों को क्या करना होगा?
ई-टिकट बुक करने वाले यात्रियों को TDR यानी Ticket Deposit Receipt फाइल करनी होती है. उपलब्ध रेलवे नियमों और रिपोर्टों के अनुसार, ट्रेन के वास्तविक प्रस्थान से पहले TDR फाइल करना जरूरी है और कारण में ट्रेन के 3 घंटे से ज्यादा लेट होने तथा यात्री के यात्रा नहीं करने की स्थिति दर्ज करनी होती है. IRCTC पर संबंधित बुकिंग में जाकर File TDR विकल्प से यह प्रक्रिया की जा सकती है. वहीं, TDR समय पर फाइल नहीं करने पर पूरे किराए के रिफंड का दावा अमान्य हो सकता है.
काउंटर टिकट वालों के लिए क्या नियम है?
अगर टिकट रेलवे रिजर्वेशन काउंटर से लिया गया है, तो यात्री को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार टिकट सरेंडर कर रिफंड मांगना होता है. रेलवे की आधिकारिक पैसेंजर रिजर्वेशन जानकारी में टिकट रिफंड और कैंसिलेशन की अलग-अलग परिस्थितियों के नियम दिए गए हैं.
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8 घंटे 48 मिनट लेट हुई ट्रेन, रेलवे को देने पड़े ₹35 हजार
ट्रेन लेट होने पर रिफंड के नियम के साथ हाल का एक मामला भी सामने आया है. झारखंड के सरायकेला जिला उपभोक्ता आयोग ने ट्रेन की करीब 8 घंटे 48 मिनट की देरी के मामले में दक्षिण पूर्व रेलवे को यात्री को ₹35,000 देने का आदेश दिया. The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, मामला सितंबर 2024 का है. यात्री ने टाटानगर से संबलपुर जाने के लिए इस्पात एक्सप्रेस की दो Sleeper Class टिकट बुक की थीं. ट्रेन निर्धारित समय से 528 मिनट यानी 8 घंटे 48 मिनट देर से संबलपुर पहुंची.
इस पर यात्री ने रेलवे को कानूनी नोटिस भेजने के बाद उपभोक्ता आयोग का रुख किया. जिस पर झारखंड के सरायकेला उपभोक्ता आयोग ने 8 घंटे 48 मिनट लेट हुई Ispat Express के मामले में दक्षिण पूर्व रेलवे को यात्री को ₹35,000 देने का आदेश दिया. इसमें ₹30,000 मुआवजा और ₹5,000 मुकदमे का खर्च शामिल है. ट्रेन टाटानगर से संबलपुर जा रही थी. आयोग ने देरी से हुई शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानी को सेवा में कमी माना. रिपोर्ट के अनुसार रेलवे को यह रकम 45 दिनों के भीतर देने का निर्देश दिया गया.
