Indian Fisheries Sector Growth: भारत का मछली पालन क्षेत्र आज सिर्फ भोजन का जरिया नहीं, बल्कि देश की इकोनॉमी की मजबूती बन चुका है. साल 2015 से अब तक सरकार ने इस सेक्टर में 39,272 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड इनवेस्टमेंट किया है. इसका नतीजा यह है कि आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एक्वाकल्चर प्रोड्यूसर देश बन गया है और पूरी दुनिया की 8% मछली अकेले भारत में पैदा होती है.
मछली प्रोडक्शन में कितनी हुई बढ़ोतरी?
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में यह सेक्टर ट्रेडिशनल से कमर्शियल बन गया है. साल 2019-20 में जहां 141.64 लाख टन मछली का प्रोडक्शन होता था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 197.75 लाख टन तक पहुंच गया है. सालाना 7% की यह ग्रोथ दिखाती है कि भारतीय मछुआरे और किसान आधुनिक तकनीकों को अपना रहे हैं. आज इस क्षेत्र से लगभग 3 करोड़ लोग सीधे जुड़े हुए हैं.
विदेशी बाजारों में कितनी बढ़ी भारतीय मछली की मांग?
भारत से समुद्री प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट पिछले 11 सालों में दोगुना हो गया है. 2013-14 में जो एक्सपोर्ट 30,213 करोड़ रुपये का था, वह 2024-25 में 62,408 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. इसमें सबसे बड़ा हाथ ‘झींगा’ (Shrimp) का है, जिसकी हिस्सेदारी 43,334 करोड़ रुपये रही है. भारत आज अमेरिका, चीन और जापान जैसे 130 देशों को 350 से ज्यादा वैरायटी की मछलियां भेज रहा है.
सरकार कैसे कर रही है इस कारोबार को आसान?
व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नियमों को बहुत सरल कर दिया है. ‘सैनेटरी इम्पोर्ट परमिट’ (SIP) की प्रोसेस अब पूरी तरह डिजिटल हो गई है, जिससे पहले लगने वाला 30 दिन का समय घटकर अब सिर्फ 72 घंटे रह गया है. इसके अलावा, समुद्र में कछुओं और समुद्री जीवों को बचाने के लिए ‘टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस’ (TED) जैसी तकनीक अपनाई जा रही है, ताकि इंटरनेशनल रुल्स का पालन हो सके और भारत के एक्सपोर्ट पर कोई रोक न लगे.
भविष्य का क्या है मेगा प्लान?
आने वाले 5 सालों में सरकार का लक्ष्य मछली के ‘वैल्यू ऐडेड’ प्रोडक्ट्स (जैसे फ्रोजन और प्रोसेस्ड फूड) का हिस्सा बढ़ाना है. इसके लिए नए कोल्ड चैन नेटवर्क और आधुनिक फिशिंग हार्बर बनाए जा रहे हैं. साथ ही, अब सिर्फ झींगा ही नहीं, बल्कि टूना और सीवीड जैसी कीमती स्पीशीज के पालन पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि भारत दुनिया का सबसे भरोसेमंद सीफूड सप्लायर बन सके.
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