India Steel Production FY26: भारत का स्टील सेक्टर इस वक्त पूरी दुनिया में अपनी चमक बिखेर रहा है. जहां एक तरफ देश स्टील उत्पादन में दुनिया में दूसरे नंबर पर बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ सरकार अब इंपोर्ट (आयात) से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने के लिए कमर कस चुकी है. इस्पात मंत्रालय (Ministry of Steel) ने ऐलान किया है कि आगामी 27 अप्रैल को नई दिल्ली में एक ‘ओपन हाउस’ सेशन रखा जाएगा. इस मीटिंग का मकसद स्टील इंपोर्ट से जुड़ी दिक्कतों, जैसे SIMS और QCO छूट (Exemptions) पर चर्चा करना है.
मीटिंग में शामिल होने का तरीका क्या है?
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, यह मीटिंग नई दिल्ली के नेताजी नगर स्थित GPOA-3 के ‘स्टील रूम’ में होगी. अगर आपकी कंपनी या इंडस्ट्री एसोसिएशन इस मीटिंग का हिस्सा बनना चाहती है, तो आपको 24 अप्रैल की दोपहर 3:00 बजे तक tech-steel@nic.in पर ईमेल भेजना होगा. ध्यान रहे कि बिना कन्फर्म टाइम स्लॉट के एंट्री नहीं मिलेगी और ‘वॉक-इन’ की सुविधा नहीं है. साथ ही, हर संस्था से केवल एक ही प्रतिनिधि को आने की अनुमति दी जाएगी. ईमेल में आपको अपनी कंपनी का नाम, प्रोडक्ट की जानकारी और अपनी समस्या का संक्षिप्त विवरण देना होगा.
आखिर क्यों पड़ी इस चर्चा की जरूरत?
स्टील इंडस्ट्री में काम करने वाली कंपनियों को अक्सर SIMS (Steel Import Monitoring System) और QCO (Quality Control Order) के नियमों को लेकर परेशानियां होती हैं. कभी कागजी कार्रवाई में देरी तो कभी छूट मिलने में दिक्कत आती है. सरकार चाहती है कि इंडस्ट्री के लोग खुद आकर अपनी बात रखें ताकि इन प्रक्रियाओं को और आसान (SARAL SIMS) बनाया जा सके. यह सत्र सुबह 11:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक चलेगा, जिसमें हर समस्या पर बारीकी से गौर किया जाएगा.
क्या भारतीय स्टील सेक्टर वाकई मजबूत हुआ है?
जी हां, वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े काफी उत्साहजनक हैं. भारत ने पिछले साल के मुकाबले 10.7% की बढ़त के साथ लगभग 168.4 मिलियन टन कच्चा स्टील (Crude Steel) पैदा किया है. देश के भीतर इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे और कंस्ट्रक्शन के काम बढ़ने से स्टील की मांग में जबरदस्त उछाल आया है. सबसे अच्छी बात यह है कि जहां भारत का स्टील एक्सपोर्ट 35.9% बढ़ा है, वहीं इंपोर्ट में 31.7% की कमी आई है, जिससे भारत फिर से एक ‘नेट एक्सपोर्टर’ (निर्यात करने वाला देश) बन गया है.
चुनौतियां क्या हैं और आगे का रास्ता क्या है?
भले ही उत्पादन बढ़ा है, लेकिन चुनौतियां कम नहीं हैं. कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बढ़ते लॉजिस्टिक्स खर्च ने कंपनियों के मुनाफे (Margins) पर दबाव बनाया है. इसके अलावा, गैस सप्लाई में रुकावट और बढ़ती ऊर्जा लागत भी एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है. सरकार की इस ओपन हाउस मीटिंग का असली उद्देश्य यही है कि इन कमियों को दूर कर सप्लाई चेन को इतना मजबूत बनाया जाए कि वैश्विक उतार-चढ़ाव का भारतीय मार्केट पर असर कम से कम हो.
ये भी पढ़ें: विदेशी पूंजी के लिए रेड कार्पेट, वोटिंग राइट्स की सीमा बढ़ाने की बड़ी तैयारी
