Income tax rules on gold holding in India: भारतीय कानूनों के अनुसार, आप अपनी ‘घोषित आय’ (Declared Income) से जितना चाहें उतना सोना खरीद और रख सकते हैं. हालांकि, आयकर विभाग के छापों या जांच के दौरान, CBDT (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) ने कुछ प्रशासनिक दिशा-निर्देश दिए हैं, जो एक निश्चित सीमा तक सोने के गहनों को ‘जब्त’ (Seize) न करने की सुरक्षा प्रदान करते हैं.
बिना रसीद या दस्तावेज के कितनी गोल्ड ज्वेलरी सुरक्षित है?
आयकर विभाग के 11 मई 1994 के सर्कुलर के मुताबिक, यदि आपके पास खरीद के बिल नहीं भी हैं, तो भी निम्नलिखित मात्रा में सोने के गहने जब्त नहीं किए जाएंगे.
- विवाहित महिला: 500 ग्राम तक सोना.
- अविवाहित महिला: 250 ग्राम तक सोना.
- पुरुष: 100 ग्राम तक सोना.
यह सीमा केवल गहनों और जेवरातों (Jewellery & Ornaments) के लिए है. ध्यान दें कि इसमें सोने के सिक्के, ईंट (Bullion) या हीरे-जवाहरात वाले गहने शामिल नहीं हैं; उनकी जांच और जब्ती के नियम अलग हो सकते हैं.
सीमा से अधिक सोना होने पर क्या होगा?
यदि आपके पास तय सीमा से अधिक सोना है, तो वह अवैध नहीं है, लेकिन आपको उसकी खरीद का स्रोत (Source of Funds) बताना होगा. इसके लिए आप निम्नलिखित दस्तावेज दिखा सकते हैं.
- खरीद की रसीदें: ज्वेलर से लिए गए पक्के बिल और बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड.
- विरासत (Inheritance): वसीयत (Will), उत्तराधिकार प्रमाण पत्र या पारिवारिक समझौते के दस्तावेज.
- उपहार (Gifts): शादी या अन्य मौकों पर मिले उपहारों के लिए ‘गिफ्ट डीड’ या समारोह की तस्वीरें.
- अन्य: यदि बिल नहीं हैं, तो वैल्युएशन रिपोर्ट या अपनी वित्तीय क्षमता का हलफनामा (Affidavit) भी पेश किया जा सकता है.
नकदी में सोना खरीदने के सख्त नियम
सोना खरीदने के लिए नकद लेन-देन पर सरकार ने कड़े प्रतिबंध लगाए हैं.
- ₹2 लाख की सीमा: एक बार में ₹2 लाख से अधिक का सोना नकद नहीं खरीदा जा सकता.
- अनिवार्य दस्तावेज: ₹2 लाख या उससे अधिक की खरीदारी के लिए PAN कार्ड या आधार कार्ड देना अनिवार्य है.
- डिजिटल पेमेंट: ₹2 लाख से ऊपर का भुगतान केवल बैंक ट्रांसफर या डिजिटल माध्यमों से ही किया जाना चाहिए.
आयकर जांच और जब्ती की प्रक्रिया
आयकर अधिकारी जांच के दौरान यह देखते हैं कि क्या सोने की मात्रा आपकी आय के स्तर से मेल खाती है. भले ही ज्वेलरी जब्त न की जाए, लेकिन आपसे उसके स्रोत के बारे में पूछताछ की जा सकती है. यदि आप संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते, तो उस पर टैक्स और पेनाल्टी लगाई जा सकती है. इसलिए, विरासत में मिले या उपहार में मिले सोने का रिकॉर्ड रखना हमेशा समझदारी भरा कदम है.
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