Sweep-in FD: अक्सर लोग अपनी मेहनत की कमाई सेविंग अकाउंट में ही पड़े रहने देते हैं. वजह साफ है कि पैसा कभी भी निकाल सकते हैं और यह सुरक्षित भी लगता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वहां रखा आपका ज्यादा पैसा सही कमाई कर रहा है या नहीं? सच यह है कि भारत के ज्यादातर बैंक सेविंग अकाउंट पर सालाना करीब 2.5% ब्याज देते हैं. ऐसे में अगर बड़ी रकम लंबे समय तक वहीं पड़ी रहे, तो उसका फायदा बहुत कम मिलता है.
कितना पैसा सेविंग अकाउंट में रखना ठीक है?
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सेविंग अकाउंट में उतना ही पैसा रखना चाहिए जितना आपके 3 से 6 महीने के खर्चों के लिए जरूरी हो. इसके अलावा थोड़ा इमरजेंसी बफर रखा जा सकता है. इससे जरूरत पड़ने पर पैसा तुरंत इस्तेमाल हो सकेगा. लेकिन अगर इससे ज्यादा रकम अकाउंट में पड़ी है, तो उसे वहीं छोड़ना समझदारी नहीं मानी जाती. ऐसा करने से आपका पैसा सिर्फ पड़ा रहता है और उस पर बहुत कम रिटर्न मिलता है.
ज्यादा पैसे का बेहतर ऑप्शन क्या है?
अगर आप चाहते हैं कि पैसा भी सुरक्षित रहे और जरूरत पड़ने पर तुरंत मिल भी जाए, तो बैंक का Sweep-in Fixed Deposit अच्छा ऑप्शन हो सकता है. इस सुविधा में आपका सेविंग अकाउंट एक एफडी से लिंक रहता है. आप एक लिमिट तय करते हैं. जैसे ही अकाउंट में तय सीमा से ज्यादा पैसा आता है, वह अपने आप एफडी में ट्रांसफर हो जाता है. इससे उस रकम पर सेविंग अकाउंट से ज्यादा ब्याज मिलता है और जरूरत पड़ने पर पैसा आसानी से वापस इस्तेमाल किया जा सकता है.
जरूरत पड़ने पर पैसा कैसे मिलेगा?
Sweep-in FD की सबसे अच्छी बात इसकी लिक्विडिटी है. अगर आपके सेविंग अकाउंट का बैलेंस तय सीमा से नीचे जाता है, तो बैंक एफडी का कुछ हिस्सा तोड़कर पैसा वापस अकाउंट में डाल देता है. कई बैंक इस सुविधा पर समय से पहले एफडी तोड़ने का अतिरिक्त चार्ज भी नहीं लेते हैं.
कितना फर्क पड़ सकता है?
मान लीजिए आपके अकाउंट में 2 लाख रुपये पड़े हैं. अगर यह रकम सेविंग अकाउंट में रहती है, तो सालभर में करीब 6,000 रुपये ब्याज मिलेगा. वहीं अगर यही रकम Sweep-in FD में चली जाए, तो यह करीब 16,000 रुपये तक कमा सकती है. यानी लगभग ढाई गुना ज्यादा फायदा.
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