सरकार ने घटायी गैर यूरिया खादों की सब्सिडी दर, चालू वर्ष में खर्च होंगे 22,186.55 करोड़ रुपये

कोरोना वायरस महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच सरकार ने बुधवार को गैर यूरिया उर्वरकों पर दी जाने वाली सब्सिडी दरों में कटौती की है.

नयी दिल्ली : कोरोना वायरस महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच सरकार ने बुधवार को गैर यूरिया उर्वरकों पर दी जाने वाली सब्सिडी दरों में कटौती की है. सरकार की इस पहल से चालू वित्त वर्ष के दौरान सरकारी खजाने पर उर्वरक सब्सिडी बोझ कम होकर 22,186.55 करोड़ रुपये रह जाने का अनुमान है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक में इस बारे में निर्णय लिया गया.

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सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया कि सीसीईए ने वर्ष 2020-21 के लिए फास्फेटिक और पोटाशिक (पीएंडके) उर्वरकों के लिए पोषण आधारित सब्सिडी (एनबीएस) दरों को मंजूरी दी है. वर्ष 2020-21 के दौरान पीएंडके उर्वरकों पर सब्सिडी के तहत कुल खर्च 22,186.55 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है.

उर्वरक मंत्रालय ने एक वक्तव्य में कहा है कि चालू वित्त वर्ष के लिए नाइट्रोजन पर सब्सिडी को पिछले साल के 18.90 रुपये से घटाकर 18.78 रुपये प्रति किलो, फास्फोरस पर 15.21 रुपये से घटाकर 14.88 रुपये किलो, पोटाश पर 11.12 रुपये से घटाकर 10.11 रुपये किलो और सल्फर पर 3.56 रुपये से घटाकर 2.37 रुपये किलो कर दिया है. वर्ष 2019.20 में इन पर कुल सब्सिडी खर्च 22,875 करोड़ रुपये था.

सीसीईए ने इसके साथ ही एनबीएस में एक कॉम्प्लेक्स उर्वरक अमोनियम फास्फेट (एनपी14:28:0:0) को भी शामिल करने को मंजूरी दी है. सरकार ने वर्ष 2010 में पोषण आधारित सब्सिडी (एनबीएस) कार्यक्रम की शुरुआत की थी. इसके तहत, यूरिया को छोड़कर सब्सिडी पर उपलब्ध कराये जाने वाले फॉस्फेटिक और पोटाशिक (पीएंडके) उर्वरकों के प्रत्येक ग्रेड के लिए सालाना आधार पर सब्सिडी राशि तय की जाती है. यह सब्सिडी उनमें मौजूद पोषक तत्व के आधार पर तय की जाती है.

इसके अलावा, डायअमोनियम फास्फेट (डीएपी) मुरिएट ऑफ पोटाश (एमओपी) और एनपीके जैसे गैर यूरिया उर्वरकों के दाम नियंत्रण मुक्त किये जा चुके हैं और इनका निर्धारण इनके विनिर्माताओं द्वारा ही किया जाता है. केंद्र सरकार हर साल उन्हें एक निर्धारित सब्सिडी उपलब्ध कराती है.

जहां तक यूरिया की बात है, सरकार इसका अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) तय कर देती है, उसके बाद उत्पादन लागत और तय किये गये एमआरपी के बीच जो अंतर होता है, वह विनिर्माताओं को उपलब्ध करा दिया जाता है. सरकार उर्वरकों और यूरिया तथा 21 ग्रेड के पीएंडके उर्वरकों को किसानों को सस्ते दाम पर सुलभ कराने के लिए विनिर्माताओं अथवा आयातकों को सब्सिडी की राशि देती है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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