Gold-Silver Price : इस सप्ताह सोना और चांदी दोनों की कीमतों में अच्छी तेजी देखने को मिली. सोना प्रति 10 ग्राम 6,471 रुपए बढ़कर करीब 1.46 लाख रुपए पर पहुंच गया, जबकि चांदी की कीमत 17,317 रुपए प्रति किलो बढ़कर 2.34 लाख रुपए हो गई.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में ऑल टाइम हाई से कीमतें नीचे आने के बाद निवेशकों ने निचले स्तर पर खरीदारी शुरू की, जिससे दोनों कीमती धातुओं में फिर से तेजी लौट आई. हालांकि, कीमतों में उतार-चढ़ाव अभी भी बना हुआ है और आगे की दिशा कई घरेलू और वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी.
इस हफ्ते सोना और चांदी कितने महंगे हुए?
इस सप्ताह सोने और चांदी दोनों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई. सोना पिछले सप्ताह के मुकाबले 6,471 रुपए प्रति 10 ग्राम महंगा होकर लगभग 1.46 लाख रुपए पर पहुंच गया. वहीं चांदी की कीमत 17,317 रुपए प्रति किलो बढ़कर करीब 2.34 लाख रुपए हो गई. बाजार में यह तेजी मुख्य रूप से निवेशकों की खरीदारी और मजबूत मांग की वजह से देखी गई.
अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग क्यों होते हैं?
कई लोग यह सवाल पूछते हैं कि एक ही दिन अलग-अलग शहरों में सोने की कीमत अलग क्यों होती है. इसके पीछे कई व्यावहारिक कारण होते हैं. सबसे पहले, एक शहर से दूसरे शहर सोना पहुंचाने में परिवहन और सुरक्षा का अतिरिक्त खर्च जुड़ता है.
इसके अलावा, हर क्षेत्र में सोने की मांग अलग होती है. दक्षिण भारत जैसे राज्यों में सोने की खपत ज्यादा होने के कारण बाजार की कीमतों पर इसका असर पड़ता है. स्थानीय ज्वेलरी एसोसिएशन भी मांग और सप्लाई के आधार पर दैनिक रेट तय करते हैं. वहीं, ज्वेलर्स के पास मौजूद पुराने स्टॉक और उनकी खरीद कीमत भी अंतिम बिक्री मूल्य को प्रभावित करती है.
साल 2026 में अब तक कितना महंगा हुआ सोना और चांदी?
पूरे साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो सोना अब तक करीब 13,145 रुपए प्रति 10 ग्राम महंगा हो चुका है. साल की शुरुआत में इसकी कीमत लगभग 1.33 लाख रुपए थी, जो अब बढ़कर करीब 1.46 लाख रुपए हो गई है. वहीं चांदी भी इस साल करीब 3,438 रुपए प्रति किलो महंगी हुई है. हालांकि, दोनों धातुएं जनवरी 2026 में बनाए गए अपने ऑल टाइम हाई से अभी भी नीचे कारोबार कर रही हैं, जिससे कई निवेशक इसे खरीदारी का अवसर मान रहे हैं.
सरकार की नई इंपोर्ट ड्यूटी का क्या असर पड़ा?
सोने और चांदी की कीमतों पर सरकार की नीतियों का भी बड़ा प्रभाव पड़ता है. मई 2026 में केंद्र सरकार ने सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी. इसमें 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 प्रतिशत एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस शामिल है. आयात महंगा होने से घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ा है. सरकार का उद्देश्य विदेशी आयात कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाना है.
विदेशी ज्वेलरी आयात के नियम क्यों बदले गए?
सरकार ने सोने, चांदी और प्लेटिनम से बनी ज्वेलरी को ‘फ्री’ कैटेगरी से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ कैटेगरी में शामिल कर दिया है. इसका मतलब है कि अब विदेश से ऐसी ज्वेलरी मंगाने के लिए विशेष लाइसेंस या सरकारी अनुमति लेनी होगी. इस कदम का उद्देश्य फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के दुरुपयोग को रोकना और आयात को नियंत्रित करना है. इससे घरेलू बाजार में सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिसका असर कीमतों पर भी पड़ सकता है.
क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?
यदि आपका उद्देश्य शादी, पारिवारिक जरूरत या लंबी अवधि का निवेश है, तो बाजार विशेषज्ञ आमतौर पर एकमुश्त खरीदारी के बजाय चरणबद्ध निवेश की सलाह देते हैं. इससे कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम होता है. वहीं, यदि आप केवल अल्पकालिक मुनाफे के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो बाजार की चाल और वैश्विक आर्थिक घटनाओं पर नजर रखना जरूरी है.
सोना खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?
सोना खरीदते समय हमेशा BIS हॉलमार्क वाला प्रमाणित गोल्ड ही खरीदें. हॉलमार्क यह सुनिश्चित करता है कि सोना निर्धारित शुद्धता का है. खरीदारी से पहले उस दिन का बाजार भाव विश्वसनीय स्रोतों से जरूर जांच लें और 24 कैरेट, 22 कैरेट तथा 18 कैरेट के दामों का अंतर भी समझें. इसके अलावा बिल लेना कभी न भूलें, क्योंकि भविष्य में एक्सचेंज या बिक्री के समय यही सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है.
असली चांदी की पहचान कैसे करें?
यदि आप चांदी खरीद रहे हैं, तो उसकी शुद्धता जांचना भी जरूरी है. असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती. उस पर बर्फ रखने पर बर्फ तेजी से पिघलती है क्योंकि चांदी गर्मी की अच्छी चालक होती है. असली चांदी में किसी प्रकार की गंध नहीं होती, जबकि नकली धातु में तांबे जैसी गंध आ सकती है. सफेद कपड़े से रगड़ने पर यदि हल्का काला निशान दिखाई दे, तो यह भी असली चांदी का एक सामान्य संकेत माना जाता है.
Expert View: आगे सोने और चांदी की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में सोने और चांदी की कीमतें कई घरेलू और वैश्विक कारकों से प्रभावित होंगी. यदि अमेरिका और अन्य प्रमुख देशों के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बदलाव करते हैं, डॉलर मजबूत या कमजोर होता है, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है या वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में फिर से सोने की ओर रुख कर सकते हैं. दूसरी ओर, यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी आती है और निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले निवेशों में ज्यादा पैसा लगाते हैं, तो सोने की कीमतों पर दबाव भी बन सकता है.
निवेशकों के लिए 5 जरूरी सुझाव
- हमेशा BIS हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदें.
- खरीदारी से पहले उस दिन का बाजार भाव विश्वसनीय स्रोत से जरूर जांचें.
- बिल और हॉलमार्क सर्टिफिकेट सुरक्षित रखें.
- केवल कीमत बढ़ने की उम्मीद में निवेश करने के बजाय अपने वित्तीय लक्ष्य तय करें.
- यदि निवेश का उद्देश्य केवल रिटर्न है, तो फिजिकल गोल्ड के साथ Gold ETF, Gold Mutual Fund या Sovereign Gold Bond जैसी उपलब्ध योजनाओं की भी तुलना करें.
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