EPFO Minimum Pension Hike 2026: रिटायरमेंट फंड संस्था EPFO के तहत आने वाले EPS-95 पेंशनर्स अपनी मांगों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर 9 मार्च से तीन दिन के विरोध प्रदर्शन पर बैठ गए हैं. EPFO की EPS-95 स्कीम के तहत आने वाले करीब 81 लाख पेंशनर्स ने पेंशन बढ़ाने की मांग को लेकर 9 मार्च से तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू किया है. बजट सत्र के दूसरे चरण के साथ शुरू हुआ यह आंदोलन अब ‘आर-पार की लड़ाई’ का रूप ले चुका है.
क्या है EPS-95 स्कीम
EPS-95 (कर्मचारी पेंशन योजना, 1995), Employees’ Provident Fund Organisation यानी EPFO द्वारा चलाई जाने वाली एक सामाजिक सुरक्षा योजना है. इस योजना के तहत ऐसे कर्मचारी, जिन्होंने कम से कम 10 साल नौकरी की है, उन्हें 58 साल की उम्र के बाद हर महीने पेंशन दी जाती है.
यह योजना संगठित और कुछ मामलों में असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सहारा देने के लिए बनाई गई है. फिलहाल इस योजना में न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये प्रति माह है. लेकिन लंबे समय से पेंशनर्स इसकी राशि बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह करने की मांग कर रहे हैं, ताकि महंगाई के दौर में उन्हें बेहतर आर्थिक मदद मिल सके.
क्या है मुख्य मांग ?
पेंशनर्स की सबसे बड़ी मांग न्यूनतम मासिक पेंशन में बढ़ोतरी है. वर्तमान में इन पेंशनर्स को औसतन 1,171 रुपये महीना पेंशन मिलती है, जबकि न्यूनतम गारंटी सिर्फ 1,000 रुपये है. पेंशनर्स इसे बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह करने की मांग कर रहे हैं, साथ ही इस पर महंगाई भत्ता (DA) भी जोड़ने की बात कही गई है.
9 साल का संघर्ष और 4 बड़ी मांगें
कमांडर अशोक राउत के नेतृत्व में ‘EPS-95 नेशनल एजिटेशन कमेटी’ पिछले नौ सालों से लगातार संघर्ष कर रही है. उनकी प्रमुख मांगें हैं
- न्यूनतम पेंशन ₹7,500: मौजूदा ₹1,000 की पेंशन को बढ़ाकर साढ़े सात हजार किया जाए.
- मुफ्त चिकित्सा सुविधा: पेंशनर्स और उनके जीवनसाथी के लिए मुफ्त इलाज का प्रावधान हो.
- हायर पेंशन का लाभ: सुप्रीम कोर्ट के 4 नवंबर 2022 के फैसले के अनुसार सभी पात्र लोगों को बढ़ी हुई पेंशन का फायदा मिले.
- बाहर हुए सदस्यों को राहत: उन पेंशनर्स को भी लाभ दिया जाए जिन्हें इस स्कीम से बाहर कर दिया गया था.
“सबका साथ, सबका विकास” पर सवाल
पेंशनर्स कमेटी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 30 से 35 साल तक EPFO में अपना योगदान देने के बावजूद उन्हें मिलने वाली रकम “नाममात्र” की है. कमेटी का आरोप है कि सरकार एक तरफ “सबका साथ, सबका विकास” का नारा देती है, लेकिन लाखों बुजुर्गों की चीखें उसे सुनाई नहीं दे रही हैं. उनका कहना है कि कई सरकारी योजनाओं में बिना किसी योगदान के पेंशन बांटी जा रही है, जबकि जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई जमा की, उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है.
हर दिन 200 से ज्यादा मौतें
आंदोलनकारियों ने बेहद दर्दनाक आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि कम पेंशन और मुफ्त इलाज की सुविधा न होने के कारण देश में हर दिन 200 से 250 बुजुर्ग पेंशनर्स समय से पहले दम तोड़ रहे हैं. पेंशनर्स का कहना है कि यह केवल एक आर्थिक मांग नहीं, बल्कि उनके “सम्मान के साथ जीने के अधिकार” की लड़ाई है.
आगे क्या ?
यह विरोध प्रदर्शन 11 मार्च तक चलेगा. इसमें देशभर के अलग-अलग राज्यों से हजारों की संख्या में पेंशनर्स पहुंच रहे हैं. कई राजनीतिक दलों के सांसदों ने भी जंतर-मंतर पहुंचकर उन्हें अपना समर्थन देने का वादा किया है. अब देखना यह है कि क्या सरकार बजट सत्र के इस दूसरे चरण में इन बुजुर्गों की जायज मांगों पर कोई ठोस फैसला लेती है या नहीं.
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