‘अमीरों पर ज्यादा टैक्स लगाओ, आम आदमी को राहत दो’, मशहूर अर्थशास्त्री संतोष मेहरोत्रा ने सरकार को दी बड़ी सलाह

Tax wealthy, not fuel and gold : यूएन के पूर्व सलाहकार संतोष मेहरोत्रा ने सरकार को चेतावनी दी है कि तेल और सोने पर टैक्स बढ़ाने से देश में बेरोजगारी और महंगाई बढ़ेगी. उन्होंने इसके बदले ‘सुपर-रिच’ और अरबपतियों पर सरचार्ज लगाने की वकालत की है.

Tax wealthy, not fuel and gold: देश में पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल, डीजल, दूध और सोने की कीमतों में जो आग लगी है, उसने आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया है. इस बीच, जाने-माने अर्थशास्त्री और यूएन के पूर्व सलाहकार संतोष मेहरोत्रा ने सरकार को अपनी वित्तीय रणनीति (Fiscal Strategy) बदलने की एक बेहद महत्वपूर्ण सलाह दी है.

न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को तेल और सोने जैसी चीजों पर इनडायरेक्ट टैक्स (अप्रत्यक्ष कर) बढ़ाकर आम जनता पर बोझ डालने के बजाय, देश के ‘सुपर-रिच’ (अति-अमीर) और अरबपतियों पर भारी टैक्स लगाना चाहिए.

“तेल-सोने पर टैक्स बढ़ाना यानी नौकरियों पर कुल्हाड़ी”

संतोष मेहरोत्रा का मानना है कि जब सरकार पेट्रोल, डीजल और सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी या टैक्स बढ़ाती है, तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान मिडिल क्लास और गरीब परिवारों को होता है. तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन महंगा होता है, जिससे हर छोटी-बड़ी चीज के दाम बढ़ जाते हैं.

टैक्स बढ़ने से छोटे और मझोले उद्योगों (MSMEs) की लागत बढ़ती है, जिससे वे बंद होने की कगार पर पहुंच जाते हैं और लोगों की नौकरियां चली जाती हैं. उन्होंने कहा, “अगर सरकार डॉलर अरबपतियों और हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) पर सरचार्ज लगा दे, तो उसे तेल या सोने के दाम बढ़ाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. अमीरों से आसानी से पैसा जुटाया जा सकता है.”

अगले 3 महीने में ₹100 का हो सकता है डॉलर!

रुपये की लगातार गिरती सेहत पर चिंता जताते हुए मेहरोत्रा ने एक बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों में रुपया ₹90 के अंदर से फिसलकर लगभग ₹96 प्रति डॉलर तक पहुंच चुका है. अगर पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहा युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव जारी रहा, तो अगली तिमाही (3 महीने) के भीतर रुपया बहुत आसानी से ₹100 के पार निकल जाएगा.

कच्चा तेल $150 के पार जाने का डर

ईरान युद्ध और वैश्विक संकट को लेकर उन्होंने एक और डराने वाली भविष्यवाणी की है. उन्होंने कहा कि अगर यह युद्ध नहीं रुका, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर सकती हैं. भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल बाहर से मंगाता है, ऐसे में $150 का रेट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं होगा.

इन सेक्टर्स पर मंडरा रहा है खतरा

मेहरोत्रा के मुताबिक, तेल, गैस और फर्टिलाइजर (खाद) की सप्लाई रुकने या महंगी होने का असर इन उद्योगों पर सबसे ज्यादा दिख रहा है.

  • सिरेमिक्स (मिट्टी/टाइल उद्योग)
  • रेस्टोरेंट और होटल बिजनेस
  • जेम्स एंड ज्वेलरी (रत्न और आभूषण उद्योग)

इन लेबर-इंटेंसिव (जहां ज्यादा लोग काम करते हैं) सेक्टर्स में मंदी आने की वजह से बड़े पैमाने पर नौकरियां जा रही हैं और शहरों से मजदूर वापस गांवों की तरफ लौटने (Reverse Migration) को मजबूर हो रहे हैं.

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लेखक के बारे में

By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

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अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

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शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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