Gold Making Charges: अगर आप भी जल्द सोने के गहने खरीदने वाले हैं, तो यह जानना बहुत जरूरी है कि आखिर मेकिंग चार्ज क्या होता है, कैसे तय होता है और किन बातों का ध्यान रखकर आप बेवजह ज्यादा पैसे देने से बच सकते हैं.
मेकिंग चार्ज आखिर होता क्या है?
मेकिंग चार्ज वह रकम है जो कच्चे सोने को खूबसूरत गहनों में बदलने के लिए ली जाती है. इसमें गहनों की डिजाइन तैयार करना, कारीगर की मेहनत, मशीनों का इस्तेमाल और पूरी निर्माण प्रक्रिया का खर्च शामिल होता है. ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत में मेकिंग चार्ज का कोई तय रेट नहीं है. यह हर शहर, हर ज्वेलर और हर डिजाइन के हिसाब से अलग हो सकता है. आमतौर पर यह ₹300 से ₹1,000 प्रति ग्राम या सोने की कीमत का 3% से 25% तक होता है. वहीं 22 कैरेट सोने के गहनों पर यह आमतौर पर 5% से 25% के बीच लिया जाता है.
गहने की अंतिम कीमत इस फॉर्मूले से तय होती है—
(प्रति ग्राम सोने की कीमत × कुल वजन) + मेकिंग चार्ज + GST = गहने की कुल कीमत
GST कितना लगता है और बिल कैसे बनता है?
सोने के गहनों पर 3% GST पूरे गहने की कीमत (सोने की कीमत + मेकिंग चार्ज) पर लगाया जाता है. लेकिन अगर ज्वेलर मेकिंग चार्ज को अलग से सर्विस के रूप में बिल में दिखाता है, तो मेकिंग चार्ज वाले हिस्से पर 5% GST लग सकता है. इसलिए खरीदारी के समय बिल का पूरा ब्रेकअप जरूर देखें.
मेकिंग चार्ज ज्यादा या कम क्यों होता है?
हर गहने का मेकिंग चार्ज एक जैसा नहीं होता. इसकी कई वजहें होती हैं.
- सोने की शुद्धता (Purity): BIS Hallmark से सोने की शुद्धता जांची जा सकती है.
- डिजाइन और कारीगरी: जितनी बारीक और मुश्किल डिजाइन होगी, मेकिंग चार्ज उतना ज्यादा होगा. शादी के भारी गहने और स्टोन वाली ज्वेलरी पर यह ज्यादा लिया जाता है.
- स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट: सोने को सुरक्षित रखने, पैकिंग, हैंडलिंग और एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का खर्च भी कई बार मेकिंग चार्ज में शामिल होता है.
मेकिंग चार्ज कैसे निकाला जाता है?
ज्वेलर आमतौर पर दो तरीकों से मेकिंग चार्ज जोड़ते हैं.
1. प्रति ग्राम के हिसाब से
अगर आपने 10 ग्राम सोना खरीदा और मेकिंग चार्ज ₹500 प्रति ग्राम है, तो—
10 × ₹500 = ₹5,000 मेकिंग चार्ज
2. प्रतिशत के हिसाब से
अगर गहने की कीमत ₹7,00,000 है और मेकिंग चार्ज 10% रखा गया है, तो—
₹7,00,000 का 10% = ₹70,000 मेकिंग चार्ज
वेस्टेज चार्ज क्या होता है?
जब गहने बनाए जाते हैं, तब सोने का थोड़ा हिस्सा पिघलाने, काटने और पॉलिश करने के दौरान खराब या कम हो जाता है. इसी नुकसान की भरपाई के लिए वेस्टेज चार्ज लिया जाता है.
- सामान्य तौर पर यह 5% से 7% तक होता है.
- हाथ से बने या ज्यादा जटिल डिजाइन वाले गहनों में यह 10% से ज्यादा भी हो सकता है.
- इसकी दर डिजाइन और ज्वेलर की नीति पर निर्भर करती है.
मेकिंग चार्ज और वेस्टेज चार्ज में क्या फर्क है?
| मेकिंग चार्ज | वेस्टेज चार्ज |
| कारीगर की मेहनत, डिजाइन और मशीनों की लागत | गहना बनाते समय खराब हुए सोने की भरपाई |
| ₹/ग्राम या प्रतिशत दोनों तरीके से लिया जा सकता है | केवल प्रतिशत के रूप में लिया जाता है |
| आमतौर पर 5% से 25% | आमतौर पर 5% से 10% |
| कई बार मोलभाव किया जा सकता है | आमतौर पर मोलभाव नहीं होता |
| अलग से बिल होने पर 5% GST लग सकता है | सोने की कीमत में शामिल होने पर 3% GST के दायरे में आता है |
छिपे हुए चार्ज से कैसे बचें?
सोना खरीदते समय सिर्फ गोल्ड रेट देखकर फैसला न करें. इन बातों का भी ध्यान रखें—
- मेल्टिंग और प्योरिटी टेस्टिंग फीस तो नहीं जोड़ी गई है.
- गहने का वजन सही तरीके से तौला गया है या नहीं.
- उस दिन का सही बाजार भाव लगाया गया है या नहीं.
- बिल में हर चार्ज अलग-अलग लिखा हुआ है या नहीं.
- बिना पूरा बिल देखे कभी भुगतान न करें.
आखिर खरीदारी करते समय क्या करें?
अगर बाजार में सोने के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, तो फिक्स्ड मेकिंग चार्ज वाला विकल्प आपके लिए बेहतर हो सकता है. वहीं अगर कीमतें गिर रही हैं, तो प्रतिशत के हिसाब से मेकिंग चार्ज फायदेमंद पड़ सकता है.
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