Airfare Cap: अगर आप अक्सर फ्लाइट से सफर करते हैं, तो नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Civil Aviation Ministry) का ताजा फैसला आपके लिए जानना बेहद जरूरी है. सरकार ने घरेलू उड़ानों (Domestic Flights) के किराए पर लगी ‘अधिकतम सीमा’ (Fare Cap) को हटाने का एलान कर दिया है. इसका सीधा मतलब यह है कि अब एयरलाइन कंपनियां सीटों की डिमांड के हिसाब से टिकटों के दाम तय कर सकेंगी.
क्यों हटाया गया किराए पर लगा ‘कैप’ ?
पिछले साल दिसंबर में इंडिगो एयरलाइंस के क्रू मेंबर्स और पायलटों की कमी (FDTL नियमों के कारण) की वजह से हजारों फ्लाइट्स कैंसिल हुई थीं. उस दौरान दिल्ली से मुंबई या बेंगलुरु जैसे रूट्स का किराया ₹80,000 तक पहुंच गया था.
यात्रियों को लूट से बचाने के लिए सरकार ने हस्तक्षेप किया और अधिकतम किराया ₹18,000 तय कर दिया था. अब मंत्रालय का कहना है कि एविएशन सेक्टर पूरी तरह से सामान्य हो गया है और उड़ानों की संख्या भी पर्याप्त है, इसलिए बाजार को खुला छोड़ना जरूरी है. यह फैसला 23 मार्च, 2026 से प्रभावी हो गया है.
सरकार की ‘पैनी नजर’ और अनुशासन की चेतावनी
भले ही सरकार ने किराए की सीमा हटा दी है, लेकिन नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने साफ किया है कि एयरलाइंस को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी.
- रियल टाइम मॉनिटरिंग: मंत्रालय लगातार टिकटों के दाम ट्रैक कर रहा है.
- कठोर कार्रवाई: अगर किसी रूट पर किराया बेवजह या 10 गुना तक बढ़ाया गया, तो इसे ‘अनुचित’ माना जाएगा और सरकार सख्त कदम उठाएगी.
- पारदर्शिता: कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि टिकट बुकिंग की प्रक्रिया पारदर्शी हो और आम यात्रियों के हितों को नुकसान न पहुंचे.
60% सीटें अब मिलेंगी बिना ‘एक्स्ट्रा चार्ज’ के
किराए की सीमा हटने के बीच, 18 मार्च को सरकार ने यात्रियों को एक बड़ी राहत भी दी है. अब तक एयरलाइंस अपनी पसंद की सीट चुनने के लिए यात्रियों से ₹500 से ₹3000 तक अतिरिक्त वसूलती थीं. अब हर फ्लाइट में कम से कम 60% सीटें बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के बुक करनी होंगी.
पहले यह कोटा सिर्फ 20% था. अगर आप एक ही PNR पर टिकट बुक कर रहे हैं, तो एयरलाइंस को आपको और आपके परिवार को एक साथ या आसपास की सीटें देनी होंगी. इसके लिए अब अलग से पैसे देने की मजबूरी खत्म होगी.
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