How to respond to Income Tax Notice: अक्सर लोग इनकम टैक्स का नाम सुनते ही परेशान हो जाते हैं, और अगर घर पर कोई टैक्स नोटिस आ जाए, तो घबराहट और बढ़ जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर नोटिस का मतलब मुसीबत नहीं होता? असल में, इनमें से ज्यादातर नोटिस सिर्फ छोटी-मोटी जानकारी मांगने या आपके द्वारा दी गई जानकारी को कन्फर्म करने के लिए भेजे जाते हैं. अगर आप सही समय पर और सही तरीके से जवाब दें, तो मामला आसानी से खत्म हो सकता है.
क्या आपका नोटिस असली है?
सबसे पहले यह पक्का करें कि जो नोटिस आपको मिला है, वह फर्जी तो नहीं है. आजकल स्कैमर्स भी फर्जी नोटिस भेजकर लोगों को डराते हैं. आप इनकम टैक्स विभाग के e-Filing Portal पर जाकर इसे वेरिफाई कर सकते हैं. इसके लिए आपके पास अपना PAN कार्ड, मोबाइल नंबर और नोटिस पर लिखा DIN (Document Identification Number) होना चाहिए. अगर पोर्टल पर नोटिस की जानकारी नहीं मिलती, तो समझ लीजिए वह फर्जी है.
नोटिस किस बारे में है?
नोटिस मिलने पर सबसे पहले उसमें लिखी ‘सेक्शन’ (Section) को पढ़ें. इससे पता चलता है कि विभाग आपसे क्या चाहता है:
- सेक्शन 143(1): यह सिर्फ एक सूचना है कि आपका टैक्स रिटर्न प्रोसेस हो गया है.
- सेक्शन 142(1): असेसमेंट से पहले विभाग आपसे कुछ अतिरिक्त जानकारी मांग रहा है.
- सेक्शन 143(2): यह स्क्रूटनी का नोटिस है, जिसमें आपकी फाइल की बारीकी से जांच की जाएगी.
- सेक्शन 148: अगर विभाग को लगता है कि आपकी कुछ इनकम पर टैक्स नहीं लगा है, तो दोबारा जांच के लिए यह नोटिस आता है.
- सेक्शन 245: अगर पुराना कोई टैक्स बकाया है और उसे आपके रिफंड से काटा जाना है, तब यह सूचना दी जाती है.
जवाब देने का सही तरीका क्या है?
नोटिस का जवाब देने के लिए आपको किसी दफ्तर के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है. सारा काम ऑनलाइन हो जाता है:
- इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग-इन करें.
- ‘Pending Actions’ टैब में जाकर ‘e-Proceedings’ पर क्लिक करें.
- वहां आपको अपना नोटिस दिखेगा, उस पर क्लिक करके अपना जवाब और जरूरी डॉक्युमेंट्स अपलोड कर दें.
- जवाब सबमिट करने के बाद Acknowledgement कॉपी डाउनलोड करना न भूलें, यह आपके पास सबूत रहेगा.
देरी की तो क्या होगा?
टैक्स विभाग के साथ संवाद में देरी या लापरवाही आपको भारी पड़ सकती है. अगर आप समय पर जवाब नहीं देते या अधूरी जानकारी देते हैं, तो आप पर भारी जुर्माना लग सकता है. मामला बढ़ गया तो विभाग आपकी कड़ी जांच (Audit) भी शुरू कर सकता है. इसलिए बैंक स्टेटमेंट, फॉर्म 16 और निवेश के सबूत हमेशा तैयार रखें. अगर मामला पेचीदा लगे, तो किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की सलाह लेने में हिचकें नहीं. सही जानकारी और समय पर कार्रवाई ही इस समस्या का सबसे सटीक समाधान है.
