लॉकडाउन में राहत : 15 मई तक बढ़ायी गयी मेडिकल और मोटर इंश्योरेंस के रिन्यूअल की डेडलाइन

वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि लॉकडाउन की अवधि के दौरान जिन चिकित्सा और वाहन बीमाओं की समयसीमा समाप्त हो रही है, उन्हें अब 15 मई तक नवीकृत (रिन्यूअल) कराया जा सकता है.

नयी दिल्ली : वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि लॉकडाउन की अवधि के दौरान जिन चिकित्सा और वाहन बीमाओं की समयसीमा समाप्त हो रही है, उन्हें अब 15 मई तक नवीकृत (रिन्यूअल) कराया जा सकता है. यह छूट उन बीमा पॉलिसी के लिए है, जिनके नवीकरण की तारीख 25 मार्च से तीन मई के बीच की है.

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वित्त मंत्रालय ने एक ट्वीट में कहा कि चिकित्सा और वाहन बीमा पॉलिसी के वैसे ग्राहकों की दिक्कतें दूर करने के लिए यह समयसीमा बढ़ायी जा रही है, जिनके पॉलिसी की समयसीमा लॉकडाउन की अवधि के दौरान समाप्त हो रही है. अब ऐसे बीमाधारक अपनी पॉलिसी का नवीकरण कराने के लिए 15 मई तक भुगतान कर सकते हैं.

वित्त मंत्रालय ने दो अलग अधिसूचनाओं में कहा कि वैसे बीमाधारक जिनका थर्ड पार्टी वाहन बीमा अथवा चिकित्सा बीमा 25 मार्च से 3 मई के बीच में समाप्त हो रहा है और वे अभी बीमा के नवीकरण का भुगतान कर पाने में सक्षम नहीं हैं, वे अब 15 मई तक भुगतान कर सकते हैं. अधिसूचनाओं में बीमा धारकों को यह भी आश्वस्त किया गया कि यदि नवीकरण कराये जाने से पहले इस अवधि में वे उचित दावा करते हैं, तो उन्हें बीमा पॉलिसी के सारे लाभ प्राप्त होंगे.

बता दें कि देश में कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिए लॉकडाउन (बंद) लागू है. पहले यह बंद 21 दिनों के लिए था और 14 अप्रैल को इसकी समयसीमा समाप्त हो रहा थी. हालांकि, बाद में इसे तीन मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है. लॉकडाउन की अवधि बढ़ाये जाने से पहले बीमा पॉलिसी के नवीकरण की समयसीमा बढ़ाकर 21 अप्रैल तक की गयी थी. हालांकि, लॉकडाउन के बढ़ाये जाने से नवीकरण की समयसीमा को और आगे बढ़ाने की जरूरत पड़ गयी.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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