Crude Oil Prices: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध और तनाव का असर अब आपकी जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है. ICICI बैंक की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, तेल की कीमतों में आई भारी उछाल भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है.
कच्चा तेल: $100 के पार
युद्ध और समुद्री रास्तों (जैसे स्वेज नहर और होर्मुज जलडमरूमध्य) में रुकावट की वजह से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं.
- मौजूदा स्थिति: तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं. तुलना के लिए, पिछले साल (अप्रैल 2025 – फरवरी 2026) यह औसतन $66 के आसपास थी.
- अनुमान: बैंक का मानना है कि इस उठापटक के बाद वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) तक तेल की कीमतें $80 प्रति बैरल के आसपास जाकर टिक सकती हैं.
भारत पर इसका सीधा असर क्यों ?
भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा बाहर से खरीदता है. रिपोर्ट के अनुसार हम अपनी तेल की जरूरत का 52-60% और गैस का 80-85% हिस्सा इसी क्षेत्र (मिडल ईस्ट) से मंगाते हैं. अगर तेल की कीमत में सिर्फ $10 की बढ़ोतरी होती है, तो भारत का ‘चालू खाता घाटा’ (CAD) लगभग 12 अरब डॉलर बढ़ जाता है.
सिर्फ तेल ही नहीं, कमाई पर भी खतरा
मिडल ईस्ट में तनाव का मतलब सिर्फ महंगा पेट्रोल-डीजल नहीं है:
- निर्यात (Exports): भारत के कुल सामान निर्यात का 15% हिस्सा इसी क्षेत्र में जाता है, जो युद्ध की वजह से रुक सकता है.
- रेमिटेंस (Remittance): विदेश से जो भारतीय पैसा घर भेजते हैं, उसका 38% हिस्सा इसी इलाके से आता है. वहां अस्थिरता होने पर यह कमाई कम हो सकती है.
व्यापार घाटे का बढ़ता बोझ
ICICI बैंक ने भारत के आर्थिक आंकड़ों में कुछ बदलाव किए हैं.
- व्यापार घाटा (Trade Deficit): पहले अनुमान था कि यह 363 अरब डॉलर रहेगा, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 383 अरब डॉलर कर दिया गया है.
- CAD (Current Account Deficit): यह देश की सेहत का पैमाना है. अब इसके GDP का 1.4% रहने का अनुमान है, जो पहले 1% माना जा रहा था.
| सेक्टर | स्थिति |
| सोना (Gold) | इसका आयात 29% तक बढ़ गया है. |
| नॉन-ऑयल निर्यात | इसमें 5% की अच्छी बढ़त देखी गई है. |
| तेल निर्यात | इसमें 17% की गिरावट आई है. |
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