तेल के दाम गिरने पर किसकी लगेगी लॉटरी? इन सेक्टरों पर रखें सबसे पहले नजर

Crude Oil Price Impact: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट इंडियन इकोनॉमी के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है. जानिए ऐसे में किन सेक्टरों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा.

Crude Oil Price Impact: इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में लगातार नरमी भारत के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है. भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से इम्पोर्ट करता है. ऐसे में तेल सस्ता होने और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने का सीधा फायदा देश की इकोनॉमी, कंपनियों और आम लोगों तक पहुंच सकता है.

एक्स्पर्ट्स के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड की कीमत में हर 1 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट से भारत के इम्पोर्ट बिल में सालाना करीब 10,000 से 13,000 करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है. इससे महंगाई पर दबाव घटेगा, रुपये को मजबूती मिलेगी और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास ब्याज दरों को लेकर बेहतर फैसले लेने की गुंजाइश बढ़ेगी. 

कौन से सेक्टर होंगे सबसे बड़े फायदे में?

सबसे ज्यादा फायदा उन सेक्टरों को होगा, जहां फ्यूल या क्रूड से बनने वाले कच्चे माल की लागत अधिक होती है.

सेक्टरफायदा कैसे मिलेगा?
एविएशनATF सस्ता होने से एयरलाइंस की लागत घटेगी और मुनाफा बढ़ सकता है. 
ऑयल मार्केटिंग कंपनियांकम कीमत पर तेल खरीदने से मार्जिन बेहतर हो सकता है. 
पेंट्सकच्चे माल की लागत घटने से कंपनियों को राहत मिलेगी. 
टायरसिंथेटिक रबर और कार्बन ब्लैक सस्ते होने का फायदा मिलेगा. 
ऑटोमोबाइलपेट्रोल-डीजल सस्ता होने से वाहनों की मांग बढ़ सकती है. 
लॉजिस्टिक्सडीजल खर्च घटने से ट्रांसपोर्ट कंपनियों की लागत कम होगी. 

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

तेल की कीमतों में गिरावट का असर सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा. 

  • पेट्रोल और डीजल का खर्च कम होने से लोगों की बचत बढ़ सकती है. 
  • परिवहन लागत घटने से महंगाई पर भी असर पड़ सकता है. 
  • लोगों के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा बचेगा, जिससे कंज्यूमर मांग बढ़ने की संभावना रहेगी. 
  • बैंक और NBFC सेक्टर को भी कम महंगाई और बेहतर आर्थिक माहौल का फायदा मिल सकता है.  

क्या इन्वेस्टर्स के लिए मौका है?

अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं और पश्चिम एशिया में तनाव नहीं बढ़ता, तो कई सेक्टरों की कमाई में सुधार देखने को मिल सकता है. हालांकि, हर कंपनी को समान फायदा नहीं मिलेगा. जिन कंपनियों की बैलेंस शीट मजबूत है, लागत पर बेहतर कंट्रोल है और कारोबार लगातार बढ़ रहा है, उनके बेहतर प्रदर्शन की संभावना ज्यादा मानी जा रही है. 

आगे क्या देखना होगा?

बाजार की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों, सरकार की टैक्स नीति और ग्लोबल हालात पर रहेगी. अगर तेल सस्ता बना रहता है और जियोपॉलिटिकल तनाव कंट्रोल रहता है, तो एविएशन, ऑयल मार्केटिंग, पेंट्स, टायर, ऑटोमोबाइल, लॉजिस्टिक्स और फाइनेंशियल सेक्टर भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख लाभार्थी बन सकते हैं. ऐसे में यह स्थिति इंडियन इकोनॉमी के लिए एक पॉजिटिव साइन मानी जा रही है. 

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लेखक के बारे में

Published by: Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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