Crude Oil Price: लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद शुक्रवार को इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखी गई. अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता को लेकर इन्वेस्टर्स में असमंजस का माहौल है, जिसके कारण ब्रेंट क्रूड 1.9% बढ़कर 104.52 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) 1.5% बढ़कर 97.81 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.
तेल की कीमतें अचानक क्यों बढ़ीं?
कीमतों में इस उछाल की मुख्य वजह ईरान से जुड़ी एक रिपोर्ट है. दरअसल, पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान से लगा था कि बातचीत आखिरी दौर में है. लेकिन बाद में रॉयटर्स के हवाले से खबर आई कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपने यूरेनियम स्टॉक को देश से बाहर भेजने से मना कर दिया है. इस उलटफेर से इन्वेस्टर्स को डर है कि यह विवाद लंबा खिंच सकता है, जिससे ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई कम हो जाएगी.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संकट क्या है?
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ा है. जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस गुजरता है. युद्ध के कारण फिलहाल सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देशों का रोजाना करीब 1.4 करोड़ बैरल तेल सप्लाई प्रभावित हो रहा है. यूएई की तेल कंपनी ADNOC के मुताबिक, अगर यह जंग आज भी खत्म हो जाए, तब भी सप्लाई को पूरी तरह सामान्य होने में 2027 की पहली या दूसरी तिमाही तक का समय लग सकता है.
आगे क्या उम्मीद है?
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी है कि गर्मियों में ट्रैवल बढ़ने से तेल की मांग बढ़ेगी, जबकि स्टॉक पहले से ही कम है. ऐसे में बाजार रेड जोन में जा सकता है. हालांकि, राहत की बात यह है कि 7 जून को होने वाली बैठक में OPEC+ देश जुलाई से तेल उत्पादन में थोड़ी बढ़ोतरी कर सकते हैं. कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले हफ्ते में कच्चा तेल 90 से 110 डॉलर के दायरे में रह सकता है.
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