कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को एक बार फिर गिरावट देखने को मिली. बाजार की नजर अब ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने को लेकर चल रही बातचीत पर है. इस रास्ते के खुलने की उम्मीद और दुनियाभर में तेल की मांग कमजोर रहने के अनुमान ने कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बनाया है.
शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 0.08% गिरकर 87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. इससे पहले गुरुवार को इसमें 2.15% की गिरावट आई थी. वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड 0.06% फिसलकर 81.20 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. पिछले सत्र में WTI करीब 2.4% टूट गया था.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर क्या चल रहा है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने को लेकर ईरान और ओमान के बीच अभी कोई समझौता नहीं हुआ है. हफ्ते की शुरुआत में ऐसी उम्मीद बनी थी कि दोनों देशों के बीच सहमति जल्द बन सकती है, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है. इसके बावजूद फारस की खाड़ी से कच्चे तेल की सप्लाई जारी है. कई टैंकर अपना ट्रांसपोंडर बंद करके इस रास्ते से गुजर रहे हैं. यानी तेल की आवाजाही पूरी तरह रुकी नहीं है, लेकिन लगातार हमलों की खबरों से बाजार में चिंता बनी हुई है. गुरुवार देर रात अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी ने बताया कि उसके दो और जहाजों पर हमला किया गया.
तेल की कीमतों पर दबाव क्यों बढ़ा?
कच्चे तेल की कीमतों पर सिर्फ सप्लाई का डर ही असर नहीं डाल रहा है. दुनियाभर में तेल की मांग कमजोर रहने का अनुमान भी कीमतों को नीचे खींच रहा है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी यानी IEA ने इस तिमाही में तेल की सप्लाई में पहले के अनुमान से ज्यादा कमी की आशंका जताई है. एजेंसी का मानना है कि 2026 में सप्लाई की कमी पांच साल के सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंच सकती है. वहीं, ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज यानी OPEC ने 2026 के लिए दुनिया की तेल मांग बढ़ने का अनुमान घटाकर रोजाना 5.80 लाख बैरल कर दिया है.
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इस खबर का आम लोगों पर क्या असर होगा?
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बदलाव का असर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए अहम होता है. हालांकि, सिर्फ एक दिन की गिरावट से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तुरंत बदलाव तय नहीं होता. लंबे समय तक तेल की कीमतों और सप्लाई की स्थिति में होने वाले बदलाव पर बाजार की नजर रहती है. फिलहाल कच्चा तेल इस हफ्ते बढ़त में रहने की राह पर है और साल की शुरुआत से अब तक 40% से ज्यादा चढ़ चुका है. फरवरी के आखिर में शुरू हुए अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद कीमतों में तेज उछाल आया है.
इसी बीच ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब की जजान रिफाइनरी को निशाना बनाने का दावा किया है. इससे पहले भी हुए हमले के कारण रिफाइनरी को फिर से शुरू करने की योजना में देरी हुई थी. ऐसे में आगे कच्चे तेल की कीमतों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति और वैश्विक सप्लाई दोनों अहम रहने वाले हैं.
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