Crude Oil Price: इसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए फैसले हैं. इन घटनाओं ने दुनिया की तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिससे बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर चली गईं.
कच्चे तेल की कीमत कितनी बढ़ी?
तेल बाजार में मंगलवार को दोनों प्रमुख बेंचमार्क में अच्छी तेजी दर्ज की गई.
- ब्रेंट क्रूड (सितंबर डिलीवरी): 85.11 डॉलर प्रति बैरल (2.14% की बढ़त)
- WTI क्रूड (अगस्त डिलीवरी): 79.91 डॉलर प्रति बैरल (2.27% की बढ़त)
- इससे पहले सोमवार को WTI क्रूड में करीब 10% की तेजी आई थी.
- ब्रेंट क्रूड करीब एक महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया.
आखिर तेल की कीमतें अचानक क्यों बढ़ी?
इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नया ऐलान है. ट्रंप ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के सभी कार्गो पर 20% शिपिंग शुल्क लगाया जाएगा. उन्होंने अमेरिका को इस समुद्री रास्ते का "Guardian" यानी रक्षक बताया. इसके साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि अमेरिका ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) फिर से लागू करेगा. जॉइंट मैरीटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर और यू.एस. सेंट्रल कमांड के मुताबिक यह कार्रवाई मंगलवार शाम 4 बजे (न्यूयॉर्क समय) से शुरू की जानी थी. ट्रंप ने यह भी कहा कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, बहरीन और कुवैत जैसे देश, जिन्हें इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा का फायदा मिलता है, उन्हें अमेरिका को इसकी सुरक्षा का खर्च देना चाहिए.
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर इतनी चिंता क्यों है?
आप सोच रहे होंगे कि आखिर एक समुद्री रास्ते की वजह से पूरी दुनिया में तेल की कीमतें कैसे बढ़ सकती हैं. दरअसल,
- दुनिया के कच्चे तेल की बड़ी सप्लाई इसी रास्ते से होकर गुजरती है.
- अमेरिका के नए फैसलों के बाद इस मार्ग से तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.
- जब सप्लाई कम होने का डर होता है, तो बाजार में तेल की खरीद बढ़ जाती है और कीमतें ऊपर चली जाती हैं.
- इसी चिंता की वजह से मंगलवार को तेल बाजार में तेज उछाल देखने को मिला.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या-क्या हुआ?
तेल की कीमतों के पीछे सिर्फ ट्रंप का ऐलान ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच बढ़ता सैन्य तनाव भी बड़ी वजह है. हाल के घटनाक्रम पर नजर डालें—
- अमेरिका ने लगातार तीसरी रात ईरान पर हमले किए.
- ईरान की सेना ने दावा किया कि उसने कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को ड्रोन से निशाना बनाया.
- ईरान ने एक दुश्मन जहाज पर क्रूज मिसाइल दागने का भी दावा किया.
- UAE ने कहा कि उसके दो तेल टैंकर ओमान के समुद्री क्षेत्र में हमला झेल चुके हैं.
- इससे पहले ईरान ने कहा था कि अमेरिका के साथ उसका समझौता अब संकट के दौर में पहुंच गया है और जब तक अमेरिका अपने वादे पूरे नहीं करेगा, तब तक वह भी समझौते का पालन नहीं करेगा.
ईरान ने ट्रंप के फैसले पर क्या कहा?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्रंप के बयान का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि—
- स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का रक्षक हमेशा ईरान रहा है और आगे भी रहेगा.
- 20% शिपिंग शुल्क बहुत ज्यादा है.
- ईरान निष्पक्ष तरीके से काम करेगा.
पिछले कुछ महीनों में क्या बदला?
तेल बाजार की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए ये बातें भी अहम हैं—
- दूसरी तिमाही में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 30% की गिरावट आई थी.
- अब कीमतें फिर करीब एक महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं.
- दो अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के बीच ईरान ने कम से कम 5.7 करोड़ बैरल कच्चा तेल निर्यात किया.
- 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों से पहले दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरती थी.
- मार्च की शुरुआत में ईरान द्वारा जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद इस रास्ते से शिपिंग कम हो गई थी.
- बाद में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच अंतरिम समझौते के बाद जहाजों की आवाजाही फिर बढ़ने लगी थी.
क्या इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल पर पड़ेगा?
फिलहाल भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. लेकिन अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है या स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है. ऐसे में इसका असर भारत समेत कई देशों में फ्यूल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजर पश्चिम एशिया के हालात और दोनों देशों के अगले कदम पर बनी हुई है.
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