Energy Crisis: केंद्र सरकार ने देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन की गति को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. शुक्रवार (27 मार्च) को जारी नए निर्देशों के अनुसार, कॉमर्शियल LPG सिलेंडर का आवंटन (Allocation) अब 50% से बढ़ाकर 70% कर दिया गया है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर इस ‘प्री-क्राइसिस लेवल’ (संकट से पहले के स्तर) को बहाल करने का आदेश दिया है.
6 सेक्टर्स को प्राथमिकता मिलेगी
मिडल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से भारत में LPG की आवक प्रभावित हुई थी, जिसका सीधा असर फैक्ट्रियों के कामकाज पर पड़ रहा था. सरकार ने साफ किया है कि इस बढ़े हुए कोटे का लाभ सबसे पहले उन उद्योगों को दिया जाएगा जहाँ मजदूरों की संख्या अधिक है और जो अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं. प्राथमिकता सूची में स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, डाइज, केमिकल्स और प्लास्टिक्स जैसे 6 बड़े सेक्टर्स को रखा गया है.
PNG का विकल्प अपनाना होगा जरूरी
सरकार ने इस राहत के साथ भविष्य के लिए एक शर्त भी जोड़ी है. अतिरिक्त 20% LPG का फायदा उठाने के लिए औद्योगिक ग्राहकों को तेल कंपनियों (OMCs) के पास रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही, उन्हें अपने शहर की गैस कंपनी के पास PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन के लिए आवेदन करना होगा. सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य यह है कि उद्योग धीरे-धीरे महंगी और अनिश्चित LPG के बजाय सुरक्षित और निरंतर PNG की ओर शिफ्ट हो जाएं.
स्पेशल हीटिंग वाले उद्योगों को नियमों में छूट
आदेश में उन विशेष उद्योगों का भी ध्यान रखा गया है जिनकी तकनीकी जरूरतें अलग हैं. अगर किसी ‘प्रोसेस इंडस्ट्री’ को ऐसी विशेष हीटिंग की आवश्यकता है जिसे नेचुरल गैस (PNG) के जरिए पूरा नहीं किया जा सकता, तो उनके लिए PNG आवेदन की शर्त को हटा दिया गया है. ऐसे उद्योगों को बिना किसी अतिरिक्त शर्त के बढ़ा हुआ 70% कोटा मिलता रहेगा, ताकि उनके उत्पादन की गुणवत्ता पर कोई असर न पड़े.
सप्लाई चेन और भविष्य की तैयारी
सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है. कोटे में 20% की इस बढ़ोतरी से उन छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को सबसे ज्यादा ऑक्सीजन मिलेगी जो पूरी तरह LPG सिलेंडर पर निर्भर हैं. मंत्रालय का मानना है कि इस कदम से औद्योगिक उत्पादन में आने वाली रुकावटें दूर होंगी और बाजारों में जरूरी सामानों की कमी नहीं होगी.
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