Budget 2026: 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक दो हिस्सों में चलेगा सत्र, देखें तारीखों की पूरी लिस्ट

Budget 2026: संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू हो चुका है. 1 फरवरी को बजट पेश होने के बाद, संसदीय समितियां इसके आवंटन की बारीकी से जांच करेंगी. संवैधानिक नियमों के अनुसार, संसद की मंजूरी के बिना सरकार न तो टैक्स लगा सकती है और न ही खर्च कर सकती है, इसलिए यह सत्र बेहद अहम है.

Budget 2026: आज यानी 28 जनवरी 2026 से 18वीं लोकसभा के बजट सत्र का आगा हो गया है. सत्र की शुरुआत काफी गहमागहमी भरी रही. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित किया. अपने 45 मिनट के भाषण में उन्होंने जब ‘VB–जी राम जी कानून’ का जिक्र किया, तो विपक्ष ने “कानून वापस लो” के नारों के साथ हंगामा भी किया. लेकिन शोर-शराबे के बीच, आम नागरिक के लिए यह समझना जरूरी है कि आखिर यह बजट सत्र होता क्या है और इसकी प्रक्रिया क्या है? आइए, तीन सवालों के जरिए इसे विस्तार से समझते हैं.

आखिर क्या होता है बजट सत्र? (What is Budget Session?)

भारतीय संसद में साल भर में तीन मुख्य सत्र होते हैं. बजट, मानसून और शीतकालीन. इनमें बजट सत्र सबसे लंबा और महत्वपूर्ण होता है.

  • शुरुआत: इसकी शुरुआत हमेशा राष्ट्रपति के अभिभाषण से होती है.
  • दो हिस्से: यह सत्र दो भागों में बंटा होता है. पहले हिस्से में बजट पेश होता है और उस पर सामान्य चर्चा होती है.
  • ब्रेक (Recess): इसके बाद कुछ हफ्तों की छुट्टी होती है. इस दौरान DRSC (विभागों से जुड़ी स्टैंडिंग कमिटी) बजट के एक-एक आंकड़े और मंत्रालयों की जरूरतों की बारीकी से जांच करती है.
  • अंतिम चरण: दूसरे हिस्से में सांसद मंत्रालयों की मांगों पर वोटिंग करते हैं और अंत में ‘वित्त विधेयक’ (Finance Bill) पास किया जाता है. नियम के अनुसार, बजट पेश होने के 75 दिनों के भीतर इसे पारित करना अनिवार्य है.

बजट पेश करने से पहले सत्र बुलाना क्यों जरूरी है?

कई लोग सोचते हैं कि सरकार सीधे बजट लागू क्यों नहीं कर देती? इसका जवाब हमारे संविधान में छिपा है. संविधान के आर्टिकल 265 और 266 के मुताबिक, सरकार बिना संसद की मंजूरी के न तो जनता पर कोई नया टैक्स लगा सकती है और न ही ‘भारत की संचित निधि’ (Consolidated Fund of India) से एक भी पैसा निकाल सकती है. लोकतंत्र में जनता के पैसे का हिसाब जनता के प्रतिनिधियों (सांसदों) के सामने रखना और उनकी अनुमति लेना अनिवार्य है. इसीलिए बजट सत्र बुलाया जाता है.

बजट 2026: कब क्या होगा?

बजट सेशन 2 सत्रों में होगा

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए यह सत्र दो चरणों में कुल 30 बैठकों के साथ चलेगा.

पहला चरण (28 जनवरी – 13 फरवरी)

28 जनवरी: सत्र की शुरुआत (राष्ट्रपति का अभिभाषण).
31 जनवरी: देश का आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) पेश होगा.
1 फरवरी: वित्त मंत्री द्वारा आम बजट पेश किया जाएगा.
2-4 फरवरी: राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और चर्चा.
13 फरवरी तक: बजट पर सामान्य बहस.
अवकाश: 14 फरवरी से 8 मार्च तक संसद बंद रहेगी (कमिटी जांच के लिए).

दूसरा चरण (9 मार्च – 2 अप्रैल)

9-25 मार्च: अलग-अलग मंत्रालयों को कितने पैसे मिलने चाहिए (Demands for Grants), इस पर चर्चा.
26-31 मार्च: अनुदान मांगों पर वोटिंग और वित्त विधेयक पर अंतिम मुहर.
2 अप्रैल: बजट सत्र का औपचारिक समापन.

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लेखक के बारे में

By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

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अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

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अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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