ब्राजील-अर्जेंटीना से बढ़ेगी दोस्ती, क्या भारतीय कारोबारियों को मिलेगा नया बाजार?

भारत दक्षिण अमेरिका के साथ कारोबार बढ़ाने की तैयारी में है. जानें MERCOSUR के साथ ट्रेड डील, चीनी विवाद और भारतीय कंपनियों के लिए बने नए मौके.

भारत दक्षिण अमेरिका के साथ अपना कारोबार बढ़ाने की तैयारी में है. कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल 24 से 28 अगस्त तक लैटिन अमेरिका के दौरे पर रहेंगे. इस दौरान ब्राजील और अर्जेंटीना के साथ जॉइंट ट्रेड कमेटी (JTC) की बैठकें होंगी. इन बातचीत का सीधा असर भारत के कारोबारियों, एक्सपोर्टर्स और उन कंपनियों पर पड़ सकता है जो दक्षिण अमेरिकी बाजार में अपना कारोबार बढ़ाना चाहती हैं.

भारत का फोकस किन देशों पर है?

राजेश अग्रवाल ब्राजील और अर्जेंटीना के साथ व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करेंगे. खास फोकस भारत और MERCOSUR के बीच मौजूदा प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) को और व्यापक बनाने पर है. भारत का MERCOSUR के साथ PTA साल 2004 से है. MERCOSUR में ब्राजील, अर्जेंटीना, पैराग्वे, उरुग्वे और बोलीविया शामिल हैं. अभी इस समझौते में करीब 450 टैरिफ लाइन्स शामिल हैं. अब इनकी संख्या और दायरा बढ़ाने पर काम हो रहा है. सरकार की तरफ से बातचीत के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को अंतिम रूप देने पर भी चर्चा होने की उम्मीद है. इसके बाद PTA को विस्तार देने के लिए औपचारिक बातचीत शुरू हो सकती है.

ये भी पढ़ें: विदेश में पढ़ाई का सपना, लेकिन पैसे की टेंशन? भारत से लें Loan या वहीं से, जानें क्या है बेहतर

कारोबारियों को इससे क्या फायदा हो सकता है?

PTA का दायरा बढ़ने का मतलब है कि ज्यादा प्रोडक्ट्स को व्यापार में बेहतर टैरिफ शर्तों का फायदा मिल सकता है. इससे भारतीय कंपनियों के लिए MERCOSUR देशों में अपने प्रोडक्ट्स पहुंचाना आसान हो सकता है. यह खास तौर पर उन भारतीय कारोबारियों के लिए अहम है जो दक्षिण अमेरिकी बाजार में एक्सपोर्ट बढ़ाने का मौका तलाश रहे हैं. भारत में काम करने वाली कंपनियों के लिए भी यह बाजार डायवर्सिफिकेशन का रास्ता खोल सकता है. इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि MERCOSUR देश दक्षिण अमेरिका की अर्थव्यवस्था में मजबूत हिस्सेदारी रखते हैं. पूरे दक्षिण अमेरिका की सामूहिक अर्थव्यवस्था करीब 4.38 ट्रिलियन डॉलर की है, जिसमें MERCOSUR देशों की हिस्सेदारी करीब 2.94 ट्रिलियन डॉलर है.

ब्राजील के साथ चीनी विवाद क्यों अहम है?

ब्राजील के साथ बातचीत में चीनी का मुद्दा भी अहम रहेगा. दोनों देशों के बीच चीनी से जुड़ा विवाद वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) तक पहुंच चुका है. ब्राजील का आरोप है कि भारत गन्ना उत्पादकों को घरेलू मदद और चीनी एक्सपोर्ट से जुड़ी कुछ योजनाओं के जरिए WTO के नियमों का उल्लंघन कर रहा है. भारत का कहना है कि घरेलू गन्ना उत्पादकों को दी जाने वाली मदद और एक्सपोर्ट स्कीम WTO में देश की प्रतिबद्धताओं के दायरे में हैं. यानी बातचीत सिर्फ नए व्यापार मौके बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मौजूदा व्यापार विवादों को सुलझाने की कोशिश भी होगी.

चीन और अमेरिका के बीच भारत के लिए क्या मौका है?

ब्राजील और अर्जेंटीना में भारतीय कंपनियों और भारतीय मूल के लोगों की मौजूदगी भी है. सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, दोनों देश चीन पर अपनी निर्भरता कम करने और अमेरिका पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता घटाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे माहौल में भारत के लिए इन बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का मौका बन सकता है. अगर PTA का दायरा बढ़ता है और व्यापार से जुड़ी रुकावटें कम होती हैं, तो भारतीय कंपनियों के लिए दक्षिण अमेरिका सिर्फ एक दूर का बाजार नहीं, बल्कि एक्सपोर्ट बढ़ाने का एक अहम रास्ता बन सकता है.

ये भी पढ़ें: इंटरनेशनल फ्लाइट यात्रियों के लिए अपडेट, 1 सितंबर से बोर्डिंग पास पर नहीं लगेगा इमिग्रेशन स्टैंप


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By सौम्या शाहदेव

सौम्या शाहदेव प्रभात खबर डिजिटल में बिजनेस कंटेंट राइटर हैं. वह शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और रोजमर्रा की आर्थिक खबरों को सरल और सटीक भाषा में पाठकों तक पहुंचाती हैं. उनका फोकस ऐसी खबरें लिखने पर रहता है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब पर असर डालती हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >