Air India News : अब यात्री सिर्फ 15 किलोग्राम वजन तक के सामान ही विमान में ले जा सकेंगे फ्री, किराया को लेकर की गई ये घोषणा

Air India News : एयर इंडिया ने फ्री चेक इन बैगेज की सीमा 20 और 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दी है. कंपनी ने इस बारे में जानकारी दी है.

Air India News : एयर इंडिया ने फ्री चेक इन बैगेज की सीमा घटाकर 20 किलो से 15 किलो कर दी है. फिलहाल एयर इंडिया ने घरेलू उड़ानों पर यह व्यवस्था लागू की है. इससे उन यात्रियों को परेशानी हो सकती है जो 20 किलो वजन तक का सामान फ्री में लेकर जाते थे. टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया कंपनी ने पिछले साल मेनू-आधारित मूल्य निर्धारण मॉडल लागू किया था, जिसके आधार पर यह बदलाव किया गया है.

पहले 25 किलोग्राम तक का सामान ले जाने की थी इजाजत

ज्ञात हो कि मेनू आधारित मूल्य निर्धारण माॅडल लागू किए जाने से पहले एयर इंडिया के घरेलू उड़ानों में यात्रियों को 25 किलोग्राम तक के वजन तक का सामान बिना किसी शुल्क के ले जाने की इजाजत थी, लेकिन अब यह 15 किलोग्राम तक आ गया है. ज्ञात हो कि अन्य एयरलाइंस कंपनियां जिनमें इंडिगो, विस्तार और स्पाइसजेट जैसी कंपनियां भी अपने यात्रियों को बिना शुल्क दिए 15 किलोग्राम तक का सामान ही अपने साथ ले जाने की इजाजत देती हैं.

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किराए में होगा 1000 रुपए तक का अंतर

एयर इंडिया के प्रवक्ता ने इस बदलाव की जानकारी शनिवार को दी. उन्होंने बताया कि 2 मई से कम्फर्ट और कम्फर्ट प्लस श्रेणियों के लिए मुफ्त चेक-इन बैगेज भत्ता क्रमशः 20 किलोग्राम और 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दिया गया है. इकोनॉमी क्लास में घरेलू मार्गों पर, कम्फर्ट और कम्फर्ट प्लस दोनों श्रेणियों में अब यात्री 15 किलोग्राम वजन तक का ही सामान ले जा सकेंगे. एयर लाइंस ने किराया के संबंध में भी जानकारी दी. प्रवक्ता ने बताया कि कम्फर्ट प्लस और फ्लेक्स के किराए में लगभग 1000 रुपये का अंतर होगा, साथ ही फ्लेक्स के यात्रियों को किराया लगभग 9000 रुपये देना होगा. वे अतिरिक्त 10 किलोग्राम वजन तक का सामान ले जा सकेंगे.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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