यूपी में किसानों की कर्ज माफी भारत के लिए खतरे की घंटी : अमेरिकी बैंक

नयी दिल्ली : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुआई में पहली कैबिनेट बैठक में किसानों के फसली ऋण माफी के फैसले पर मुहर लगा दी गयी. इसके तहत छोटे और मझोले किसानों का एक लाख रुपये तक का फसली ऋण माफ कर दिया गया है. 2.15 करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलेगा. योगी […]

नयी दिल्ली : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुआई में पहली कैबिनेट बैठक में किसानों के फसली ऋण माफी के फैसले पर मुहर लगा दी गयी. इसके तहत छोटे और मझोले किसानों का एक लाख रुपये तक का फसली ऋण माफ कर दिया गया है. 2.15 करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलेगा.

योगी के इस फैसले से किसान तो खुश है लेकिन इसका बुरा प्रभाव देश के जीडीपी पर पड़ने के आसार हैं. अमेरिकी बैंक ने भारत को आइना दिखाते हुए कहा कि किसानों की मर्ज माफी का जो फैसला लिया गया है उसका आने वाले दिनों में बुरा प्रभाव देखने को मिलेगा. देश का जीडीपी पर इसका काफी असर होगा.

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उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से किसानों की कर्ज माफी पर लिये गये फैसले का आंकलन कर रहे अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म ने कहा, 2019 तक इस कर्ज का बोझ देश की जीडीपी का दो प्रतिशत हो जाएगा. गौरतलब हो कि योगी सरकार की ओर से किसानों को बड़ी राहत देने के बाद से देश के अन्य राज्यों से भी किसानों की कर्ज माफी की मांग जोर पकड़ने लगी है.
अमेरिकी बैंक के मेरिल लिंच ने सोमवार को एक नोट जारी करते हुए कहा, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले किसानों की कर्ज माफी राजकोषिय और ब्याज दर पर बुरा प्रभाव डाल सकता है. कंपनी का मानना है कि यह कर्ज माफी जीडीपी का दो प्रतिशत हो जाएगा.

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गौरतलब हो कि किसानों की कर्ज माफी पर सरकार 30 हजार 729 करोड़ रुपये खर्च करेगी. इसके अलावा सात लाख किसानों का 5630 करोड़ एनपीए भी माफ किया गया है. यानी किसानों को कुल 36395 करोड़ रुपये की सौगात दी गयी है. इसके लिए पैसा सरकार किसान राहत बॉन्ड जरिये जुटायेगी.

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