8th Pay Commission : केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लागू करने की तैयारियां देश भर में जोर-शोर से चल रही हैं. वेतन आयोग की कमिटी के सदस्यों और विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच देश के अलग-अलग शहरों में लगातार बैठकों का दौर जारी है.
इस बार की बैठकों में न केवल फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) और महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी पर बात हो रही है, बल्कि रिटायर्ड केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक नई और अधिक सुरक्षित पेंशन व्यवस्था शुरू करने पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है. 1.1 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के परिवारों के भविष्य को देखते हुए रिटायरमेंट के बाद की सामाजिक सुरक्षा इस समय चर्चा का मुख्य केंद्र बन गई है.
उम्र-आधारित और 67% पेंशन की बड़ी मांग
राष्ट्रीय संयुक्त परामर्श तंत्र (NC-JCM) ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) को सौंपे गए अपने ज्ञापन (Memorandum) में पेंशनधारकों के हक में कुछ बेहद महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे हैं.
- पेंशन राशि में बढ़ोतरी: संगठनों का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद सम्मानजनक जीवन जीने के लिए (जिसमें कम से कम दो सदस्यों का गुजारा हो सके) पूरी पेंशन राशि को मौजूदा 50% से बढ़ाकर ‘आखिरी बार मिली सैलरी’ (Last Pay Drawn – LPD) या पिछले 10 महीनों की सैलरी के औसत का 67% तय किया जाना चाहिए (इनमें से जो भी राशि अधिक और फायदेमंद हो).
- हर 5 साल में 5% अतिरिक्त पेंशन: मेमोरेंडम में एक संसदीय स्थायी समिति की पुरानी सिफारिश का हवाला देते हुए प्रस्ताव रखा गया है कि रिटायरमेंट के बाद बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य खर्चों को देखते हुए हर 5 साल में पेंशन में 5% की अतिरिक्त बढ़ोतरी की जानी चाहिए.
कर्मचारियों को मिल सकता है अपनी पसंद का पेंशन सिस्टम चुनने का मौका
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, हालिया बैठकों में पेंशन व्यवस्था में लचीलापन (Flexibility) लाने पर गंभीर मंथन हुआ है. इस नए प्रस्ताव के तहत कर्मचारियों को यह स्वतंत्रता दी जा सकती है कि वे अपनी जरूरत और सुविधानुसार नीचे दिए गए तीन मुख्य पेंशन मॉडलों में से किसी एक को खुद चुन सकें:
- पुरानी पेंशन योजना (OPS): यह एक ‘तय-फायदे’ (Defined Benefit) वाली योजना है, जिसमें कर्मचारी की आखिरी सैलरी और महंगाई भत्ते के आधार पर एक निश्चित पेंशन की गारंटी मिलती है. इसका पूरा वित्तीय बोझ सरकार उठाती है और कर्मचारियों की सैलरी से इसके लिए कोई पैसा नहीं कटता.
- नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS): यह एक ‘योगदान-आधारित’ (Contribution-based) मॉडल है. इसमें नौकरी के दौरान कर्मचारी की सैलरी का एक हिस्सा कटता है और उतनी ही राशि सरकार मिलाती है. रिटायरमेंट पर मिलने वाली पेंशन अंततः बाजार (Market) के रिटर्न और कुल जमा कॉर्पस पर निर्भर करती है.
- यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS): यह सरकार द्वारा हाल में लाया गया एक मध्यम मार्ग है, जो एनपीएस के फंड मैनेजमेंट के साथ-साथ एक निश्चित सुनिश्चित पेंशन (Assured Pension) की सुरक्षा का विकल्प देता है.
1.1 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन पर सीधा असर
यह नया वेतन आयोग भारत के इतिहास का आठवां आयोग है. देश में पहला वेतन आयोग जनवरी 1946 में बनाया गया था, और तब से स्थापित परंपरा के अनुसार हर 10 साल में एक नया वेतन आयोग गठित किया जाता है. 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था. इस आयोग की सिफारिशें लागू होने से देश के 1.1 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों (जिनमें सेवारत केंद्रीय कर्मचारी, पेंशनभोगी और उनके आश्रित परिवार शामिल हैं) के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे में व्यापक और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा.
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