नोटबंदी और जीएसटी के बाद वित्त वर्ष बदलकर जोखिम नहीं लेना चाहती है सरकार
नयी दिल्ली : नोटबंदी और जीएसटी की मार झेल रही देश की अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है. बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष बदलने का प्लान को फिलहाल के लिए टाल दिया है. पहले इस तरह की घोषणा हुई थी कि […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
नयी दिल्ली : नोटबंदी और जीएसटी की मार झेल रही देश की अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है. बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष बदलने का प्लान को फिलहाल के लिए टाल दिया है. पहले इस तरह की घोषणा हुई थी कि वित्त वर्ष अप्रैल – मार्च की बजाय जनवरी – दिसंबर किया जायेगा. ज्ञात हो कि पिछले करीब 150 साल से देश में वित्त वर्ष अप्रैल से मार्च तक चलता है, लेकिन सरकार ने वैश्विक ट्रेंड को देखते हुए जनवरी – दिसबंर करने का फैसला लिया था.
नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स दरों में हुए बदलाव को लेकर अर्थव्यवस्था अभी तक सहज नहीं हो पायी है. छोटे व्यापारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. ज्यादातर अर्थशास्त्री जहां नोटबंदी की आलोचना करते पाये गये वहीं जीएसटी को लेकर सराहना हुई. लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जीएसटी के सकरात्मक नतीजे आने में थोड़ा वक्त लग सकता है.
15 दिन पहले पेश हो सकता है आम बजट
केंद्र सरकार अगले साल से आम बजट को पेश करने की तारीख को एक महीना पहले कर सकती है. इस साल केंद्र सरकार ने आम बजट 1 फरवरी को पेश किया था. अब इसे 15 दिन और पीछे खिसकाने की बात चल रही है. अगर ऐसा होता है तो फिर आम बजट 15 जनवरी को पेश हो सकता है.