Bihar Election 2025: नालंदा में घमासान, एनडीए के किले में सेंध लगाने की जुगत में महागठबंधन, सीधा मुकाबला

Bihar Election 2025: नालंदा विधानसभा क्षेत्र से आठ बार विधायक रहे जदयू के कद्दावार नेता श्रवण कुमार को महागठबंधन की ओर से कांग्रेस प्रत्याशी कौशलेंद्र कुमार उर्फ छोटे मुखिया चुनौती दे रहे हैं. दोनों प्रत्याशी एक ही जाति से हैं, जिससे गोलबंदी तेज हो गयी है. चुनावी तापमान के बीच राजगीर संवाददाता ने लोगों की नब्ज टटोलने की कोशिश है. पेश है विस्तृत रिपोर्ट

Bihar Election 2025: नालंदा जिले का नालंदा विधानसभा क्षेत्र जदयू का गढ़ रहा है. यहां से एनडीए की ओर से जदयू के वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार इस बार भी मैदान में हैं. उनके सामने महागठबंधन ने कांग्रेस के कौशलेंद्र कुमार उर्फ छोटे मुखिया सामने हैं. दोनों एक ही जाति से आते हैं. इससे एक खास जाति के वोट में बिखराव की आशंका है. इन सबके बीच जदयू को अपने अभेद्य किले को बचाने के लिए जद्दोजहद करना पड़ेगा.

एक ही चर्चा, कौन मारेगा बाजी

दूसरी ओर जदयू के कब्जे से नालंदा सीट को अपने पाले में लाने का कांग्रेस हर संभव प्रयास कर रहा है. कांग्रेस अपने कोर वोट को एकजुट रखने, अपने जातीय वोट को अपनी ओर लाने और नाराज वोटर को मनाने में जुटा है. नालंदा प्राचीन काल से शिक्षा का केंद्र रहा है. गांव के चौपाल से लेकर चाय की दुकानों और खेत-खलिहान से लेकर बाजार तक हर जगह एक ही चर्चा है. इस बार कौन बाजी मारेगा. एनडीए व महागठबंधन के बीच को लड़ाई में जन सुराज की कुमारी पूनम सिन्हा दिलचस्प बनाने में जुटी हैं.

नतीजा सिर्फ इस आधार पर तय नहीं होगा

नालंदा विधानसभा क्षेत्र से कुल 10 उम्मीदवार चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं, लेकिन मुकाबला सीधे जदयू और कांग्रेस के बीच दिख रहा है. इसी बीच मेरी मुलाकात भूई गांव के रामरूप प्रसाद से हुई. उनका कहना है कि इस बार यहां की लड़ाई रोचक होनेवाली है. नतीजा सिर्फ जातीय समीकरण से तय नहीं होगा. काम के साथ छवि भी वोटर देखेगा. मुकाबला दिलचस्प इसलिए भी है क्योंकि लड़ाई सिर्फ दो दलों की नहीं बल्कि एक जाति के भीतर नेतृत्व और नाराजगी की भी है.

बढ़ौना के सत्येंद्र प्रसाद ने बताया कि रोजगार और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी की गयी है। किसानों की उपजाऊ जमीन पर इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने की साजिश की जा रही है. बेलदार बिगहा के दयानंद प्रसाद सिंह ने कहा कि श्रवण कुमार द्वारा क्षेत्र का चहुमुखी विकास किया गया है. नीरपुर के पंकज कुमार, मोवारकपुर के देवनंदन प्रसाद ने कहा कि नीतीश कुमार के विकास कार्यों के कारण जदयू का पलड़ा भारी दिख रहा है. नालंदा विवि से सटे बड़गांव गांव के प्रो अरुण कुमार कहते हैं कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के इर्दगिर्द 52 तालाब हुआ करता था. आजतक उन तालाबों की किसी जनप्रतिनिधि ने खोज खबर नहीं ली.

ग्रामीणों की नाराजगी के बीच वोटों में बिखराव की चिंता

नालंदा विधानसभा क्षेत्र में एयरपोर्ट के लिए बढ़ौना व मेयार मौजा की जमीन सरकार ने ली है. इस कारण यहां के किसानों में स्थानीय विधायक के प्रति नाराजगी है. वहीं, खेल विवि व स्टेडियम बनने के बाद जल की निकासी बेहतर नहीं होने से ठेरा, हिंदूपुर समेत आसपास के गांवों के खेतों में पानी भर जाता है. किसानों ने बताया कि पहले ही खेती की जमीन कम हो गयी है. उस पर पानी भर जाने से फसलों को नुकसान हो रहा है. इनका कहना है कि इनकी नाराजगी नीतीश कुमार से नहीं है. पर, स्थानीय विधायक ने इस समस्या के निराकण के लिए कुछ नहीं किया.

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जातीय गोलबंदी से हो रही है परेशानी

श्रवण कुमार श्याम सुंदर सिंह को चुनाव हराकर नालंदा के विधायक बने थे तब से अब तक लगातार हुए नालंदा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. इससे स्पष्ट होता है कि श्रवण कुमार का वर्चस्व नालंदा विधानसभा क्षेत्र में जबरदस्त है लेकिन इस वर्चस्व के भीतर वर्तमान समय में दो खेमे में बट गया है. एक खेमा श्रवण कुमार के साथ दूसरा खेमा कौशलेंद्र कुमार उर्फ छोटे मुखिया के साथ है. बांसवान बीघा के झूलन प्रसाद कहते हैं कि अब लड़ाई पार्टी की नहीं रही कुर्मी के भीतर ही दो खेमा बन गया है.

डेटा एक नजर में

कुल मतदाताओं की संख्या : 3,25,148
महिला मतदाता की संख्या : 1,53,479
पुरुष मतदाता की संख्या : 1,71,660
कुल मतदान केंद्र : 389
कुल प्रत्याशी मैदान में 10

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लेखक के बारे में

Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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