आखिर काले रंग के ही क्यों होते हैं टायर? कइयों को नहीं पता इसके पीछे की वजह

गाड़ियों के टायर काले सिर्फ दिखावे के लिए नहीं होते, इसके पीछे साइंस काम करता है. टायर का रंग काला होने की असली वजह है कार्बन ब्लैक, जिसे टायर बनाते समय रबर में मिलाया जाता है. आइए इसके बारे में डिटेल में जानते हैं.

क्या आपने कभी सोचा है कि गाड़ियों के टायर लगभग हमेशा काले ही क्यों होते हैं? पहली नजर में आपको यह सिर्फ एक नॉर्मल डिजाइन चॉइस लग सकती है, लेकिन इसके पीछे वजह स्टाइल से ज्यादा साइंस और सेफ्टी से जुड़ी है. असल में, टायर का काला रंग उनकी मजबूती, टिकाऊपन और हीट कंट्रोल से भी जुड़ा होता है. आइए आपको इसके बारे में डिटेल में बताते हैं.

काले रंग के ही क्यों होते हैं टायर?

आपको बता दें कि टायर हमेशा से काले नहीं हुआ करते थे. जब 19वीं सदी के आखिर और 20वीं सदी की शुरुआत में रबर के टायर पहली बार आए थे, तब उनका रंग काला नहीं बल्कि सफेद या हल्का ऑफ-व्हाइट होता था. ऐसा इसलिए क्योंकि नेचुरल रबर अपने असली रूप में दूधिया सफेद होता है. लेकिन एक बड़ी दिक्कत थी. शुरुआती टायर जल्दी घिस जाते थे और ज्यादा टिकाऊ नहीं होते थे.

फिर कहानी में बड़ा ट्विस्ट आया. कंपनियों ने रबर में कार्बन ब्लैक नाम का एक खास पदार्थ मिलाना शुरू किया. यह पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को कंट्रोल्ड तरीके से जलाकर बनाया गया बेहद महीन काला पाउडर होता है. जैसे ही इसे रबर में मिलाया गया, टायर पहले से कहीं ज्यादा मजबूत, टिकाऊ और जल्दी नहीं घिसने वाला बन गए. और यहीं से टायरों का काला रंग भी नॉर्मल हो गया.

कैसे कार्बन ब्लैक बढ़ाता है टायर की सेफ्टी और लाइफ?

बात जब टायर की मजबूती और सेफ्टी की आती है, तो कार्बन ब्लैक बहुत अहम भूमिका निभाता है. यह रबर की मजबूती बढ़ा देता है, जिससे टायर भारी वजन, तेज रफ्तार और खराब सड़कों का दबाव आसानी से झेल पाते हैं. साथ ही, यह टायर की हीट सहने की कैपेसिटी को भी बढ़ाता है.

दरअसल, जब गाड़ी चलती है तो टायर और सड़क के बीच घर्षण से गर्मी पैदा होती है. अगर यह गर्मी ज्यादा बढ़ जाए, तो रबर को नुकसान पहुंच सकता है और टायर की लाइफ कम हो सकती है. यहीं कार्बन ब्लैक काम आता है. यह गर्मी को सही तरीके से फैलाने और बाहर निकालने में मदद करता है. इससे ओवरहीटिंग नहीं होती और ड्राइव ज्यादा सेफ बनती है.

एक और बड़ा फायदा मिलता है अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों और ओजोन से सेफ का. तेज धूप और हवा के लगातार कॉन्टैक्ट में रहने से रबर समय के साथ सूखकर फटने लगता है और कमजोर पड़ जाता है. लेकिन यहां कार्बन ब्लैक ढाल की तरह काम करता है. यह टायर को बाहरी नुकसान से बचाता है, जिससे टायर ज्यादा समय तक मजबूत और टिकाऊ बना रहता है.

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By Ankit anand

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अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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