कार में आग लगने के बाद गेट क्यों नहीं खुलते? जानें इसके पीछे की वजह और इमरजेंसी में बाहर निकलने के ये उपाय

कार में आग लगना बेहद खौफनाक हो सकता है, खासकर जब दरवाजे लॉक हो जाएं. जानिए ऐसा क्यों होता है और ऐसी इमरजेंसी स्थिति से कैसे बचें. इस आर्टिकल में इमरजेंसी निकास के आसान उपाय भी बताए गए हैं.

कार में आग लगने की घटना बहुत डरावनी होती है. अक्सर देखा गया है कि आग लगते ही कार के दरवाजे लॉक हो जाते हैं और अंदर बैठे लोग बाहर नहीं निकल पाते. ऐसा मुख्य रूप से गाड़ी के इलेक्ट्रिकल सिस्टम के तुरंत ठप पड जाने और सेंट्रल लॉकिंग के जाम होने के कारण होता है. ऐसी स्थिति में कई बार ड्राइवर या अंदर बैठे पैसेंजर्स जो जान भी गंवानी पड़ती है. अब सवाल है कि आखिर ऐसा क्यों होता है कि कार में आग लगने पर गेट लॉक हो जाते हैं? इसके पीछे की वजह क्या है और इससे कैसे बचा जाए? आइए इसके बारे में जानते हैं.

दरवाजे जाम होने के कारण क्या हैं?

आज की नई गाडियों में सेंट्रल लॉकिंग, पावर विंडो और सेंसर जैसे कई इलेक्ट्रिकल फीचर्स आते हैं. कार में आग लगते ही सबसे पहले शॉर्ट सर्किट होता है, जिससे गाड़ी का मुख्य इलेक्ट्रिकल सिस्टम और वायरिंग जल जाती है. जैसे ही बिजली की सप्लाई बंद होती है, कार का ऑटोमैटिक लॉकिंग सिस्टम उसी हालत में लॉक हो जाता है. इसके अलावा आग की तेज गर्मी से दरवाजों के अंदर लगे प्लास्टिक, रबर और मेटल के पुर्जे पिघलकर आपस में चिपक जाते हैं, जिससे दरवाजा मैन्युअली खींचने पर भी नहीं खुलता है.

इमरजेंसी में बाहर निकलने के आसान तरीके

अगर आप कभी ऐसी स्थिति में फंस जाएं, तो सबसे पहले घबराने के बजाय दिमाग से काम लें. अगर दरवाजे नहीं खुल रहे हैं, तो सीट के हेडरेस्ट को तुरंत बाहर निकालें. हेडरेस्ट के नीचे लगी लोहे की नुकीली रॉड से खिड़की के कांच के किसी एक कोने पर जोर से प्रहार करें. कांच तुरंत टूट जाएगा और आप आसानी से बाहर निकल सकेंगे.

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कांच तोड़ते समय ध्यान रखने योग्य बातें

ध्यान रखें कि कार के सामने का शीशा यानी विंडशील्ड बहुत मजबूत होता है और वह आसानी से नहीं टूटता है. इसलिए हमेशा साइड की खिड़की का कांच तोड़ने की कोशिश करें. कार के ग्लोव बॉक्स में हमेशा एक छोटा इमरजेंसी सेफ्टी हैमर रखें, जिससे कांच तोड़ना और भी आसान हो जाता है. अगर सीट बेल्ट का लॉक जाम हो जाए, तो सेफ्टी हैमर में लगे कटर से बेल्ट को काटकर अलग हो जाएं.

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कार में आग लगने से कैसे बचाएं?

कार में बिना सोचे-समझे बाहर से सस्ती एक्सेसरीज या गलत वायरिंग न करवाएं, क्योंकि ज्यादातर मामलों में आग गलत वायरिंग और शॉर्ट सर्किट की वजह से ही लगती है. अपनी गाड़ी की समय-समय पर सर्विसिंग कराएं और फ्यूल पाइप में किसी भी तरह के लीक की जांच करते रहें. गाड़ी में हमेशा एक छोटा आग बुझाने वाला सिलेंडर रखें ताकि शुरुआती आग पर तुरंत काबू पाया जा सके.


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By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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