SUV के पीछे क्यों भाग रही हैं कंपनियां, क्या खत्म हो रहा है हैचबैक कारों का दौर?

भारतीय कार बाजार में SUV की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है. ज्यादा मुनाफा और ग्राहकों की बदलती पसंद के चलते कंपनियां नए हैचबैक मॉडल लाने से बच रही हैं और SUV पर फोकस बढ़ा रही हैं.

भारतीय कार बाजार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान ग्राहकों की पसंद तेजी से बदली है. कभी छोटी हैचबैक कारें मध्यम वर्ग की पहली पसंद हुआ करती थीं, लेकिन अब SUV सेगमेंट ने बाजार की तस्वीर बदल दी है. ऊंचा ग्राउंड क्लीयरेंस, दमदार रोड प्रेजेंस और आधुनिक फीचर्स की वजह से खरीदार तेजी से SUV की ओर बढ़ रहे हैं. यही कारण है कि वाहन निर्माता कंपनियां भी अब नए हैचबैक मॉडल लाने के बजाय SUV पोर्टफोलियो को मजबूत करने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं.

SUV की बढ़ती लोकप्रियता ने बदला बाजार

इंडस्ट्री के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 2025 में यात्री वाहन बिक्री में SUV और क्रॉसओवर मॉडल्स की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत तक पहुंच गई. दूसरी तरफ हैचबैक सेगमेंट की हिस्सेदारी करीब 22 प्रतिशत पर सिमट गई. दिलचस्प बात यह है कि हैचबैक की बिक्री अब भी 10 लाख यूनिट सालाना से ऊपर है, लेकिन इसमें तेज वृद्धि देखने को नहीं मिल रही.

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में पूरी तरह नई पेट्रोल या डीजल हैचबैक कारों की लॉन्चिंग की संभावना बेहद कम है. जो मॉडल विकास के चरण में हैं, वे या तो मौजूदा कारों के अपडेटेड वर्जन हैं या फिर उनके इलेक्ट्रिक अवतार.

कंपनियां SUV पर ज्यादा पैसा क्यों लगा रही हैं?

ऑटो उद्योग में सबसे बड़ा कारण मुनाफा माना जा रहा है. कई मामलों में हैचबैक और SUV एक ही प्लैटफॉर्म, इंजन और अन्य मैकेनिकल पार्ट्स साझा करती हैं. इसके बावजूद ग्राहक SUV के लिए ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार रहते हैं.

यही वजह है कि जहां एक सामान्य हैचबैक पर कंपनियों का मार्जिन सीमित रहता है, वहीं समान आकार की SUV पर कई गुना ज्यादा लाभ मिल सकता है. बेहतर कमाई की संभावना कंपनियों को SUV सेगमेंट में लगातार निवेश करने के लिए प्रेरित कर रही है.

SUV vs Hatchback: हैचबैक सेगमेंट पूरी तरह खत्म नहीं होगा

हालांकि SUV का दबदबा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हैचबैक कारें बाजार से गायब हो जाएंगी. पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहकों, छोटे परिवारों और शहरों में रहने वाले लोगों के बीच इनकी मांग अब भी बनी हुई है.

कम कीमत, बेहतर माइलेज और आसान ड्राइविंग की वजह से हैचबैक आज भी बड़ी संख्या में खरीदारों को आकर्षित करती हैं. यही कारण है कि कंपनियां मौजूदा मॉडलों को बनाए रखते हुए उनमें नए फीचर्स जोड़ रही हैं.

फीचर्स के दम पर बचाई जा रही है हैचबैक की चमक

ऑटो कंपनियां अब हैचबैक कारों को पहले से ज्यादा आधुनिक बनाने की कोशिश कर रही हैं. हाल ही में लॉन्च हुई नई पीढ़ी की कुछ हैचबैक कारों में 360 डिग्री कैमरा, वायरलेस चार्जिंग, छह एयरबैग और कनेक्टेड तकनीक जैसे फीचर्स देखने को मिल रहे हैं.

पहले ये सुविधाएं केवल महंगी SUV और प्रीमियम कारों तक सीमित थीं. अब इन्हें छोटे सेगमेंट की कारों में शामिल करके ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है.

SUV vs Hatchback: आने वाले वर्षों में कैसी होगी तस्वीर?

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में SUV भारतीय बाजार की सबसे प्रमुख श्रेणी बनी रहेगी. नई लॉन्चिंग, तकनीकी निवेश और मार्केटिंग का बड़ा हिस्सा इसी सेगमेंट में जाता रहेगा.

वहीं हैचबैक बाजार धीरे-धीरे एक रिप्लेसमेंट सेगमेंट में बदल सकता है, जहां ग्राहक नई कार खरीदने के बजाय पुराने मॉडल को अपडेटेड संस्करण से बदलेंगे. इसके बावजूद किफायती व्यक्तिगत परिवहन के विकल्प के रूप में हैचबैक की भूमिका आने वाले वर्षों में भी महत्वपूर्ण बनी रह सकती है.

यह भी पढ़ें: माइलेज के मामले में ये कारें हैं सबसे आगे, जानिए SUV, हैचबैक और सेडान के टॉप ऑप्शन

यह भी पढ़ें: Mercedes से Tata तक, जून 2026 में लॉन्च होने वाली हैं कई जबरदस्त कारें

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Rajeev kumar

राजीव, हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और प्रभातखबर डॉट कॉम में कार्यरत हैं. अपने 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारीय अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. आसान भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी कंटेंट राइटिंग की सबसे बड़ी पहचान है.

राजीव की एक्सपर्टीज स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग के साथ-साथ डिजिटल ट्रेंड्स जैसे टॉपिक्स में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, ऑफिशियल डेटा, कंपनी अपडेट्स और एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी यूजर्स तक पहुंचाते हैं.

डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. Google Discover और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारी भरे होते हैं, बल्कि यूजर्स की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, कॉम्पैरिजन-बेस्ड आर्टिकल्स और एक्सप्लेनर स्टोरीज को यूजर्स काफी पसंद करते हैं.

राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन, पॉजिटिव जर्नलिज्म और फीचर राइटिंग जैसे अलग-अलग बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई.

जमशेदपुर में जन्मे राजीव की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने भारतीय विद्या भवन, पुणे से जर्नलिज्म ऐंड मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उनको आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में यूजर्स तक पहुंचाने में मदद करती है.

जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >